कांस्टेबल से IPS अधिकारी तक उदय कृष्णा रेड्डी का सफर, संघर्ष और मेहनत से हासिल किया बड़ा मुकाम

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नई दिल्ली। पुलिस कांस्टेबल के पद से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) तक पहुंचने वाले उदय कृष्णा रेड्डी की कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और लगातार प्रयास करने की प्रेरक मिसाल है। आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के एक गांव से आने वाले उदय ने सीमित संसाधनों और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद सिविल सेवा में जाने का सपना देखा। उनकी यात्रा ने उन युवाओं का ध्यान खींचा है, जो कठिन परिस्थितियों के बीच अपने करियर को नई दिशा देना चाहते हैं।

उदय कृष्णा रेड्डी ने वर्ष 2013 में आंध्र प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के रूप में नौकरी शुरू की थी। नौकरी के दौरान उनके मन में सिविल सेवा परीक्षा पास करने और बड़े प्रशासनिक दायित्व तक पहुंचने की इच्छा बनी रही। हालांकि, पुलिस की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय निकालना उनके लिए आसान नहीं था। व्यक्तिगत चुनौतियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास जारी रखा।

वर्ष 2018 में वरिष्ठ अधिकारी के साथ हुए एक घटनाक्रम के बाद उन्होंने कांस्टेबल की नौकरी छोड़कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर पूरा ध्यान लगाने का फैसला किया। इसके बाद उनके सामने प्रतियोगी परीक्षा की कठिन राह थी। शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी।

वर्ष 2023 की सिविल सेवा परीक्षा में उदय ने अखिल भारतीय स्तर पर 780वीं रैंक हासिल की। इस सफलता के बाद उनका चयन भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (IRMS) में हुआ। लेकिन उनका लक्ष्य भारतीय पुलिस सेवा में जाना था। इसलिए उन्होंने आगे भी प्रयास जारी रखा और वर्ष 2024 की सिविल सेवा परीक्षा में 350वीं रैंक हासिल कर आईपीएस के लिए चयन का रास्ता बनाया।

उदय कृष्णा रेड्डी की यात्रा बताती है कि करियर की शुरुआत में मिलने वाला पद किसी व्यक्ति की भविष्य की संभावनाओं की अंतिम सीमा तय नहीं करता। हालांकि, सफलता के पीछे केवल प्रेरणा ही नहीं, बल्कि निरंतर अध्ययन, समय का प्रबंधन, असफलताओं से सीखना और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता भी अहम भूमिका निभाते हैं। उनकी कहानी सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए मेहनत और धैर्य का संदेश देती है।

कांस्टेबल के रूप में पुलिस सेवा शुरू करने से लेकर आईपीएस के लिए चयनित होने तक उदय कृष्णा रेड्डी ने कई चुनौतियों का सामना किया। उनकी उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि स्पष्ट लक्ष्य और लगातार प्रयास से कठिन रास्तों पर भी आगे बढ़ा जा सकता है। उनकी यात्रा युवाओं को अपनी परिस्थितियों से निराश होने के बजाय उपलब्ध अवसरों का उपयोग करने और अपने सपनों के लिए प्रयास करते रहने की प्रेरणा देती है।

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