पांचवीं में गणित में मिले थे 5 अंक, तीसरे प्रयास में बनीं IPS; जानिए छत्तीसगढ़ की अंकिता शर्मा का सफर
रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर की आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा की कहानी मेहनत, आत्मविश्वास और असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। स्कूली जीवन में गणित जैसे विषय से जूझने से लेकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 203वीं रैंक हासिल करने तक का उनका सफर आसान नहीं रहा। आज उनकी यात्रा खासकर उन युवाओं और महिला अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणादायक मानी जाती है, जो पुलिस और प्रशासनिक सेवाओं में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
अंकिता शर्मा मूल रूप से छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की रहने वाली हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल में पढ़ाई के शुरुआती वर्षों में उन्हें गणित में कठिनाई का सामना करना पड़ा था। पांचवीं कक्षा में गणित में 50 में से केवल पांच अंक मिलने और पूरक परीक्षा की नौबत आने का जिक्र भी उनकी कहानी में किया जाता है। हालांकि, शुरुआती शैक्षणिक मुश्किलों ने उनके आगे बढ़ने के इरादे को खत्म नहीं किया। समय के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान दिया और बेहतर प्रदर्शन की दिशा में मेहनत की।
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद अंकिता ने आगे की पढ़ाई भिलाई में की और प्रबंधन की पढ़ाई भी की। इसी दौरान भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में जाने का उनका सपना मजबूत हुआ। यूपीएससी की तैयारी के लिए उन्होंने गंभीर प्रयास शुरू किए। सिविल सेवा परीक्षा में उनका पहला प्रयास मुख्य परीक्षा तक पहुंचा, लेकिन वे निर्धारित कटऑफ से पीछे रह गईं। दूसरे प्रयास में भी उन्हें प्रारंभिक परीक्षा में सफलता नहीं मिली।
लगातार दो प्रयासों में असफलता के बावजूद अंकिता शर्मा ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी तैयारी की कमियों को समझा और रणनीति में बदलाव करते हुए तीसरे प्रयास पर ध्यान केंद्रित किया। वर्ष 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 203वीं रैंक हासिल की। इस सफलता के आधार पर उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा में हुआ और उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला। वह 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं।
पुलिस सेवा में आने के बाद अंकिता शर्मा ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदारियां निभाईं। वह भाटापारा और रायपुर के आजाद चौक क्षेत्र में पुलिस अधिकारी के रूप में काम कर चुकी हैं। मई 2022 में उन्हें खैरागढ़ जिले का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया, जहां वह जिले की पहली महिला एसपी बनीं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिसिंग से जुड़ी जिम्मेदारियों के कारण भी उनका नाम चर्चा में रहा है। उनकी सख्त कार्यशैली के चलते उन्हें लोकप्रिय रूप से ‘लेडी सिंघम’ भी कहा जाता है।
अंकिता शर्मा की यात्रा यह संदेश देती है कि शुरुआती कमजोरियां या लगातार मिलने वाली असफलताएं किसी व्यक्ति के भविष्य का अंतिम फैसला नहीं होतीं। लक्ष्य स्पष्ट हो, अपनी कमियों को स्वीकार कर उनमें सुधार करने की इच्छा हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो आगे बढ़ने के रास्ते बन सकते हैं। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए खास संदेश रखती है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान निराशा का सामना करते हैं और अपने सपनों को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं।
