केंद्रीय जेल निर्माण टेंडर में बड़ा खेल! तीन स्तरीय जांच के बाद भी कूटरचना नहीं पकड़ी गई, विभाग को 9 करोड़ का नुकसान | MPT News

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बिलासपुर के बैमा–नगोई क्षेत्र में प्रस्तावित 1500 क्षमता वाली नई केंद्रीय जेल के निर्माण टेंडर में एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। वर्क कैपेसिटी से जुड़े दस्तावेजों में लगभग 700 करोड़ रुपये का भारी अंतर पाया गया है, बावजूद इसके कि विभागीय प्रक्रिया के अनुसार दस्तावेजों की तीन स्तरों पर जांच होती है।

फिर भी यह कूटरचना विभागीय जांचों से बच गई, जिससे अफसरों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


कैसे सामने आया नया फर्जीवाड़ा?

टेंडर जिस फर्म बालाजी इंजीकॉम को दिया गया है, उस पर आरोप है कि उसने क्वालिफिकेशन वर्क के दस्तावेजों में हेरफेर कर टेंडर हासिल किया। शिकायतकर्ता सैदा निवासी अनिल दुबे ने बताया कि—

  • विभाग को जमा की गई वर्क लिस्ट
  • और 7 अक्टूबर 2025 को NIT क्रमांक 470/TC/2025-26 में प्रकाशित वर्क लिस्ट

दोनों में लगभग 700 करोड़ रुपये का भारी फर्क नजर आता है।

दोनों दस्तावेज राज्य मुख्य मार्ग 24 (राजनांदगांव–डोगरगांव–चौकी–मोहला–मानपुर) के 93.90 किमी चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य से जुड़े हैं।


टेंडर पर टेंडर — 3 साल में 7 बार प्रक्रिया दोहराई गई

जेल निर्माण के टेंडर में पिछले तीन वर्षों में कई बार विवाद और निरस्तीकरण हुए:

  1. पहला टेंडर (2022) — कोई ठेकेदार शामिल नहीं हुआ, निरस्त
  2. दूसरा टेंडर — दर अधिक होने पर रद्द
  3. तीसरा टेंडर — मां भगवती कंस्ट्रक्शन को मिला, लेकिन दस्तावेज विवाद में निरस्त
  4. चौथा टेंडर — कोर्ट केस लंबित होने पर निरस्त
  5. पांचवां टेंडर — 131 करोड़ में विनोद जैन को मिला, अधिक दर के कारण रद्द
  6. छठवां टेंडर — तारीख बढ़ाई गई, बाद में निरस्त
  7. सातवां टेंडर — अंततः 0.11% न्यूनतम दर पर खोला गया

लगातार विवाद और रद्दीकरण के चलते जेल निर्माण वर्षों से अटका हुआ है, जबकि बिलासपुर जेल में क्षमता से 600 अधिक बंदी पहले से ही ठुंसे हुए हैं।


तीन स्तर की जांच बेकार — जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही उजागर

बड़े सरकारी टेंडरों में दस्तावेजों की जांच इस प्रकार होती है:

  1. प्रमुख अभियंता कार्यालय
  2. मुख्य अभियंता कार्यालय
  3. कार्यपालन अभियंता कार्यालय

फिर भी भारी कूटरचना पकड़ी नहीं गई, जिससे दो अफसरों की भूमिका पर सवाल उठे—

  • कमलेश पिपरी (ENC)
  • विजय कुमार कोराम

आरोप है कि लापरवाही के कारण सरकार पर 9 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा।


क्यों हुआ नुकसान?

पहले टेंडर में दर थी — 7.35%
अब अंतिम टेंडर मिला — 0.11%

दोनों दरों के बीच भारी अंतर ने सरकार पर 9 करोड़ रुपये का वित्तीय भार डाल दिया।


अधिकारियों का पक्ष

कमलप्रीत सिंह, सचिव – लोक निर्माण विभाग, रायपुर

“केंद्रीय जेल निर्माण टेंडर में कूटरचना की कोई शिकायत विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। यदि मामला आता है तो जांच कराई जाएगी।”

आरके रात्रे, मुख्य अभियंता – बिलासपुर सर्किल

“जेल टेंडर से संबंधित शिकायत मेरी जानकारी में नहीं है। शिकायत आने पर कार्रवाई की जाएगी।”


विशेषज्ञ की राय

एसके जैन, पूर्व चीफ इंजीनियर (PWD):
“टेंडर निरस्त करने का अधिकार कार्यपालन अभियंता के पास होता है। चीफ इंजीनियर सिर्फ निरस्तीकरण की अनुशंसा कर सकता है।”

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