रायपुर जेल में खूनी झड़प: पूर्व मुख्यमंत्री से जुड़े नेता पर कैदी ने किया हमला, तांत्रिक केके श्रीवास्तव से संबंध पर उठे सवाल
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित सेंट्रल जेल एक बार फिर हिंसा की घटनाओं के चलते सुर्खियों में आ गई है। गुरुवार को जेल परिसर में एक विचाराधीन कैदी ने कथित रूप से युवा कांग्रेस से जुड़े नेता आशीष शिंदे पर जानलेवा हमला कर दिया। इस वारदात में ब्लेड जैसे धारदार हथियार का इस्तेमाल किया गया। हमले के बाद शिंदे को गंभीर अवस्था में मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनके चेहरे, सीने और हाथों में गंभीर चोटें बताई जा रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हमला साई नामक कैदी और उसके एक सहयोगी द्वारा अंजाम दिया गया। जेल के भीतर इस प्रकार का हमला सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है—आखिर हथियार जेल में पहुंचा कैसे और यह हमला संभव कैसे हुआ?
राजनीतिक कनेक्शन ने बढ़ाई हलचल
शिंदे की पृष्ठभूमि इसे एक सामान्य कैदी से जुड़ी घटना से कहीं आगे ले जाती है। वे रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में युवा कांग्रेस के पदाधिकारी रह चुके हैं। उन पर यह आरोप है कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी और चर्चित तांत्रिक केके श्रीवास्तव को फरार कराने में मदद की थी, जिसके चलते उन्हें भी हिरासत में लिया गया था और वर्तमान में वे विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बंद हैं।
जेल की सुरक्षा पर उठे सवाल
हमले के बाद जेल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। धारदार हथियार जेल के अंदर कैसे पहुंचा? क्या यह हमला पहले से नियोजित था या किसी पुरानी रंजिश का परिणाम? इन सभी पहलुओं की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है, और हमलावर कैदियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
केके श्रीवास्तव से जुड़ा मामला
तांत्रिक केके श्रीवास्तव का नाम पहले भी कई बड़े घोटालों और ठगी के मामलों से जुड़ चुका है। उसके कथित राजनैतिक संबंध और विवादित गतिविधियों को लेकर मीडिया में खूब चर्चा हो चुकी है। आशीष शिंदे पर आरोप है कि उन्होंने श्रीवास्तव के फरार होने में मदद की थी, और यही मामला उनकी गिरफ्तारी की वजह बना।
जेल में लगातार बढ़ रही हिंसा
गौरतलब है कि इससे पहले भी रायपुर जेल में हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं। बीते सप्ताह कैदियों साहिल और सोहेल द्वारा साथी बंदियों पर हमले की घटना सामने आई थी। बढ़ती वारदातों ने जेल में रहने वाले अन्य कैदियों के मन में भय का माहौल बना दिया है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या जेल प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम साबित हो रहा है?
