हथियार छोड़कर उम्मीद की राह पर बस्तर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बताया बदलाव का नया भारत
देश में माओवाद के खिलाफ चल रही मुहिम अब ठोस बदलाव की तस्वीर पेश कर रही है। बीते एक वर्ष में माओवाद से जुड़े लगभग दो हजार लोगों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है, जिससे प्रभावित इलाकों में शांति और भरोसे का माहौल बना है। इसका असर सीधे तौर पर लाखों नागरिकों के जीवन पर पड़ा है, जो वर्षों से भय और अस्थिरता में जी रहे थे।

माओवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब बदलाव साफ नजर आ रहा है। बीजापुर जिले के एक गांव में 26 वर्षों के बाद बस सेवा शुरू होना स्थानीय लोगों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं रहा। यह केवल परिवहन की सुविधा नहीं, बल्कि विकास और विश्वास की वापसी का प्रतीक बन गया।
बस्तर क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों में बड़ी संख्या में युवा हिस्सा ले रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि अब बंदूक की जगह खेल और भविष्य की योजनाएं उनकी प्राथमिकता बन रही हैं।
हथियार छोड़ चुके कई पूर्व माओवादी आज सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। जगदलपुर के पंडुम कैफे में ऐसे ही लोग आम नागरिकों की सेवा करते नजर आ रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर बदलाव संभव है।
संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे लोगों का जीवन दोबारा पटरी पर आए। उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं, जब देश से आतंकवाद और हिंसा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
