संसद में अमित शाह ने छत्तीसगढ़ को नक्सल-मुक्त घोषित किया, बड़े नक्सली कमांडरों के खात्मे से मिली बड़ी सफलता
देश में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर सरकार लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है और इसी कड़ी में संसद में भी इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की गई। सरकार ने वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने के अपने प्रयासों का पूरा खाका पेश किया। इस दौरान यह बताया गया कि पिछले कुछ समय में कई बड़े नक्सली कमांडरों को या तो मार गिराया गया है या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है, जिससे नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
हाल ही में वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया, जिसे सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। इस समूह में महिला नक्सली भी शामिल थीं। आत्मसमर्पण के दौरान भारी मात्रा में हथियार भी सौंपे गए, जिससे यह साफ संकेत मिला कि संगठन की ताकत कमजोर हो रही है।
इसके अलावा, एक करोड़ के इनामी नक्सली कमांडर देवजी ने भी सरेंडर कर दिया। देवजी माओवादी संगठन का बड़ा चेहरा था और केंद्रीय समिति का अहम सदस्य माना जाता था। उसके आत्मसमर्पण को नक्सल आंदोलन के कमजोर पड़ने का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
सुरक्षा बलों ने कई खतरनाक नक्सलियों को मुठभेड़ में ढेर भी किया है। झारखंड में 2.35 करोड़ के इनामी अनल दा को मार गिराया गया, जो कई बड़े हमलों में शामिल था। इसी तरह ओडिशा में एक करोड़ के इनामी गणेश उइके को भी एनकाउंटर में खत्म किया गया, जो झीरम घाटी जैसे हमलों का मास्टरमाइंड था।
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुई मुठभेड़ में दिलीप बेडजा, माड़वी कोसा और लख्खी मड़काम जैसे कुख्यात नक्सलियों को ढेर किया गया। मौके से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए, जिससे नक्सलियों की बड़ी साजिश को नाकाम किया गया।
इसके अलावा, माड़वी हिडमा जैसे खतरनाक नक्सली कमांडर को भी एनकाउंटर में मार गिराया गया, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम था। वह कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था, जिनमें दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे हमले शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि लगातार ऑपरेशन, आत्मसमर्पण नीति और विकास कार्यों के चलते नक्सलवाद अब अंतिम दौर में है। आने वाले समय में देश को पूरी तरह नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है और इस दिशा में सुरक्षा बल तेजी से काम कर रहे हैं।
