कांकेर की लाल मिट्टी से एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचे अनिमेष कुजूर, 41.06 सेकंड में जीता ब्रॉन्ज
छत्तीसगढ़ के कांकेर से जुड़ी खेल प्रतिभा अनिमेष कुजूर ने एशियन गेम्स 2026 में देश के लिए कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियन गेम्स में अनिमेष भारतीय टीम का हिस्सा रहे, जिसने मिक्स्ड 4×100 मीटर रिले में 41.06 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। इस प्रदर्शन के साथ भारतीय टीम ने इस स्पर्धा का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया।
भारतीय चौकड़ी में गुरिंदरवीर सिंह, स्नेहा शानुवाली, अनिमेष कुजूर और हरिता भद्रा शामिल थे। टीम ने बारिश से प्रभावित फाइनल में शानदार तालमेल दिखाते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। चीन ने 40.78 सेकंड के साथ स्वर्ण और थाईलैंड ने 40.87 सेकंड के साथ रजत पदक जीता।
कांकेर की गलियों और नरहरदेव मैदान से शुरू हुआ सफर
अनिमेष कुजूर का खेल सफर छत्तीसगढ़ के कांकेर से गहराई से जुड़ा हुआ है। मूल रूप से जशपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले अनिमेष का बचपन कांकेर में बीता। उनके पिता अमृत कुजूर और मां रीना कुजूर लंबे समय तक कांकेर पुलिस में तैनात रहे।
अनिमेष ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कांकेर के सेंट माइकल स्कूल से की। कक्षा पांचवीं तक पढ़ाई करने के बाद वे आगे की शिक्षा के लिए सैनिक स्कूल, अंबिकापुर चले गए। छुट्टियों में कांकेर लौटने पर वे नरहरदेव मैदान में फुटबॉल खेलते थे और इसी मैदान की लाल मिट्टी पर उन्होंने दौड़ने का शुरुआती अभ्यास भी किया।
आज जब अनिमेष अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीत रहे हैं, तो उनके सफर में कांकेर के नरहरदेव मैदान की भूमिका खास तौर पर याद की जा रही है।
लॉकडाउन में पिता ने संभाली कोच की भूमिका
अनिमेष के एथलेटिक्स सफर में साल 2020 का दौर भी महत्वपूर्ण रहा। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन लगने पर खेल गतिविधियां प्रभावित हो गई थीं। इसी दौरान अनिमेष कांकेर वापस आए।
प्रोफेशनल कोच और नियमित खेल सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के बावजूद उनके पिता अमृत कुजूर ने उनकी ट्रेनिंग में मदद की। पुलिस विभाग में कार्यरत पिता ने खुद कोच की भूमिका निभाते हुए उन्हें अभ्यास कराया। नरहरदेव मैदान में अनिमेष ने घंटों मेहनत की और अपनी रफ्तार को निखारने पर ध्यान दिया।
एक प्रतियोगिता में जीते पांच गोल्ड
इसी दौर में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की जिला स्तरीय प्रतियोगिता में अनिमेष ने अलग-अलग स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन किया और पांच गोल्ड मेडल अपने नाम किए। यह उपलब्धि उनके एथलेटिक्स करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
इसके बाद अनिमेष ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। World Athletics के रिकॉर्ड में भी उनके नाम 100 मीटर, 200 मीटर और रिले स्पर्धाओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन दर्ज है।
एशियन गेम्स 2026 में 41.06 सेकंड की राष्ट्रीय रिकॉर्ड वाली रिले और कांस्य पदक ने उनके सफर को एक नई ऊंचाई दी है। कांकेर की लाल मिट्टी पर शुरू हुई यह दौड़ अब एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंच चुकी है।
