कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट केस: 26 साल बाद गिरफ्तार हुआ सबसे वांछित आरोपी “टेलर राजा”, एलके आडवाणी की हत्या की थी साजिश
कोयंबटूर | तमिलनाडु पुलिस और एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने 1998 में कोयंबटूर में हुए भयावह सिलसिलेवार बम धमाकों के मुख्य साजिशकर्ता में से एक सादिक उर्फ राजा उर्फ टेलर राजा को करीब 26 साल बाद गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी कर्नाटक से की गई, जहां वह लंबे समय से पहचान छिपाकर रह रहा था।
कोयंबटूर में LK आडवाणी की हत्या की थी साजिश
14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर शहर में 12 से अधिक स्थानों पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, जिनमें 58 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए थे। ये हमले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को निशाना बनाकर किए गए थे, जो उस समय कोयंबटूर में एक चुनावी सभा को संबोधित करने वाले थे।
पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक, एलके आडवाणी की कार बम ब्लास्ट के संभावित स्थल से कुछ ही मिनटों की दूरी पर थी, लेकिन सुरक्षा घेरे और वक्त की चूक के कारण वह हमले में बाल-बाल बच गए। यह हमला देश की राजनीति में अब तक के सबसे संगठित राजनीतिक आतंकी हमलों में से एक माना जाता है।
आरोपी का परिचय और आतंकी कनेक्शन
गिरफ्तार आरोपी का नाम है सादिक उर्फ राजा उर्फ टेलर राजा उर्फ वलरंथा राजा, उम्र 48 वर्ष, जो कोयंबटूर के उक्कडम क्षेत्र के बिलाल एस्टेट का निवासी है। वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-उम्मा का सक्रिय सदस्य था, जिसकी स्थापना इस केस के मुख्य आरोपी एस. ए. बाशा ने की थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, राजा ने कोयंबटूर के वल्लल नगर स्थित एक किराए के मकान में रहकर धमाकों के लिए बम बनाने और स्टोर करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। पेशे से दर्जी राजा पर कोयंबटूर, मदुरै और नागोर में हत्या और हिंसा के कई मामले दर्ज हैं।
गुप्त सूचना पर हुई गिरफ्तारी
ATS को कर्नाटक में राजा की मौजूदगी की गोपनीय सूचना मिली थी, जिसके आधार पर उसे बुधवार को पकड़ा गया। उसे कोयंबटूर लाकर PRS कैंपस में पूछताछ की जा रही है। आज उसे न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की संभावना है।
एक और वांछित आरोपी अब भी फरार
ध्यान देने वाली बात यह है कि मुजीबुर रहमान, जो कि कोयंबटूर के ओप्पनाक्करा स्ट्रीट का निवासी है, भी फरवरी 1998 से फरार है और अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर है।
कोयंबटूर ब्लास्ट केस: पृष्ठभूमि
यह हमला देश के इतिहास में उस समय का सबसे भीषण आतंकी हमला था। इसे देश में तेजी से उभरती हिंदुत्ववादी राजनीति के खिलाफ एक जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा गया। 1997 में कोयंबटूर में सांप्रदायिक दंगे हुए थे, जिसमें कई मुस्लिम युवकों की मौत हुई थी। इसी की प्रतिक्रिया स्वरूप अल-उम्मा ने ये धमाके रचे, ताकि आडवाणी की हत्या कर सांप्रदायिक आग और भड़काई जा सके।
जांच एजेंसियों को मिली बड़ी कामयाबी
टेलर राजा की गिरफ्तारी से इस 26 साल पुराने केस की गुत्थी एक बार फिर सक्रिय हो गई है। ATS और CB-CID को उम्मीद है कि राजा की पूछताछ से कई और पर्दाफाश होंगे और अन्य फरार आरोपियों का भी सुराग मिलेगा।
