छत्तीसगढ़ में डीजीपी ने अचानक बुलाई इमरजेंसी मीटिंग, चाकूबाजी और नशे पर कड़े कदम उठाने के निर्देश
रायपुर। जन्माष्टमी की छुट्टी के दिन जब पुलिस अधिकारी आराम के मूड में थे, तभी अचानक पुलिस मुख्यालय से आए एक संदेश ने सबको सतर्क कर दिया। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम ने रविवार सुबह सभी रेंज के आईजी को निर्देश दिए कि दोपहर 12 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आपात बैठक होगी। यह बैठक पहले से तय नहीं थी, लेकिन लगातार बढ़ रही चाकूबाजी की घटनाओं को देखते हुए इसे जरूरी समझा गया।
पुराना पुलिस मुख्यालय स्थित इंटेलिजेंस विंग में करीब तीन घंटे चली इस बैठक में एडीजी इंटेलिजेंस अमित कुमार भी मौजूद रहे। बैठक में प्रदेशभर के रेंज आईजी से कहा गया कि चाकूबाजी की घटनाओं पर तत्काल प्रभावी नियंत्रण बेहद आवश्यक है। इसके लिए अधिकारियों से ठोस सुझाव और कार्ययोजना भी मांगी गई। आँकड़ों के अनुसार, रायपुर और बिलासपुर रेंज सबसे अधिक प्रभावित हैं जहाँ पिछले सात महीनों में 120 मामले दर्ज हुए और 122 लोग घायल हुए हैं।
हाईकोर्ट ने भी जताई सख्ती
बैठक में यह मुद्दा भी सामने आया कि चाकू आसानी से किराना दुकानों, जनरल स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफार्म से खरीदे जा रहे हैं। इस संबंध में हाईकोर्ट पहले ही सख्त रुख अपनाते हुए डीजीपी, रेंज आईजी, बिलासपुर एसपी, गृह सचिव और मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा तलब कर चुका है। इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
पुलिस की सड़कों पर मौजूदगी बढ़ाने के निर्देश
डीजीपी ने बैठक में नशे के कारोबार और बिना परमिट चल रहे वाहनों पर भी कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस की सार्वजनिक उपस्थिति और गश्त को और मजबूत किया जाए ताकि अपराधियों में डर कायम रहे। साथ ही डीएसपी स्तर के अधिकारियों को भी फील्ड में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान चाकूबाजी रोकने के संभावित उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। छुट्टी के दिन बुलाई गई यह आपात बैठक इस बात का संकेत है कि पुलिस मुख्यालय इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह सजग और सक्रिय है। आने वाले महीनों में अपराध के आँकड़े यह दिखाएँगे कि इस बैठक के निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना असर हुआ।
