7 गांवों में 100% हेलमेट पहनने का रिकॉर्ड! महिला कमांडो की अनोखी पहल से सड़क सुरक्षा में बना नया इतिहास
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर पुलिस की एक अनूठी पहल ने नई मिसाल कायम की है। महिला कमांडो टीम ने लगातार जनजागरूकता अभियान चलाकर जिले के सात गांवों को 100% हेलमेट उपयोग वाले मॉडल ग्राम बना दिया। इस अभियान के तहत 1,103 दोपहिया वाहन चालकों को नियमित रूप से हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित किया गया, जिसके बाद सभी गांवों में शत-प्रतिशत हेलमेट उपयोग सुनिश्चित हुआ।
यह अभियान पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज अभिषेक शांडिल्य की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन तथा पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल के निर्देशन में संचालित किया गया। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से महिला कमांडो टीम ने गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया और हेलमेट के महत्व को समझाया।
अभियान के दौरान 73 महिला कमांडो ने चयनित गांवों में घर-घर सर्वे किया। जिन लोगों के पास हेलमेट नहीं थे, उन्हें हेलमेट खरीदने और हर यात्रा के दौरान उसका नियमित उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान का मुख्य संदेश था कि हेलमेट केवल चालान से बचने का साधन नहीं, बल्कि दुर्घटना के समय जीवन बचाने वाला सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है।
लगातार जागरूकता और जनसंपर्क के परिणामस्वरूप गुंडरदेही विकासखंड के जेवरतला और सिद्दी, बालोद विकासखंड के बोरी और खैरवाही तथा डौंडी लोहारा विकासखंड के अन्नू टोला, कसही बोरी और जामुलवाही सहित कुल सात गांवों में 100 प्रतिशत हेलमेट उपयोग सुनिश्चित किया गया। इस उपलब्धि के बाद इन सभी गांवों को “मॉडल हेलमेट ग्राम” के रूप में विकसित किया गया।
इस अभियान की रूपरेखा तैयार करने और इसे जनभागीदारी से जोड़ने में पद्मश्री शमशाद बेगम एवं महिला कमांडो सहयोगी जन कल्याण समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। महिला कमांडो के उत्कृष्ट कार्य की सराहना करते हुए पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज ने टीम को शॉल और सर्च टॉर्च भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही इस मॉडल को जिले के अन्य गांवों और शहरी क्षेत्रों में भी लागू करने के निर्देश दिए। बालोद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा और यातायात जागरूकता से जुड़े ऐसे नवाचारपूर्ण अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रहेंगे।
