छत्तीसगढ़: मशरूम फैक्ट्री से 97 मजदूरों को बंधनमुक्त कराया गया, 47 नाबालिग और गर्भवती महिलाएं भी शामिल

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राजधानी रायपुर के समीप खरोरा क्षेत्र में स्थित एक मशरूम निर्माण इकाई में मजदूरों को बंधक बनाकर जबरन श्रम करवाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 97 मजदूरों को छुड़ाया गया, जिनमें 47 नाबालिग, कई महिलाएं और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। यह कार्रवाई तब की गई जब दो मजदूरों ने किसी तरह वहां से भागकर पुलिस को इसकी जानकारी दी।

घटना उमाश्री राइस मिल परिसर में संचालित ‘मोजो मशरूम कंपनी’ की है, जहां यूपी, एमपी और बिहार से लाए गए मजदूरों को काम के नाम पर बंधक बनाकर रखा गया था। आरोप है कि मजदूरों से दिन-रात काम कराया जाता था और वेतन मांगने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी। कुछ मजदूरों के अनुसार उन्हें बेलचे और चाकू से धमकाया गया

पूरा मामला तब खुला जब जौनपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी गोलू और रवि अपने परिवार सहित कंपनी से 2 जुलाई की रात किसी तरह भाग निकले। करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर रायपुर पहुंचे और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से एसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद प्रशासन और पुलिस की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कंपनी परिसर में छापा मारा।

छापे के दौरान मौके पर महिलाएं, पुरुष और बच्चे मौजूद थे, जिनमें 47 नाबालिग भी शामिल थे। सभी को मुक्त कराकर रायपुर के इंडोर स्टेडियम में अस्थायी रूप से ठहराया गया, जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण और पूछताछ की जा रही है। नाबालिगों से बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम ने विशेष रूप से पूछताछ की।

मजदूरों ने बताया कि उन्हें रात 2 बजे उठाकर 18-18 घंटे तक काम कराया जाता था। भोजन भी समय पर नहीं मिलता था और किसी को बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। सबसे गंभीर आरोप यह है कि महिलाओं और नाबालिगों के साथ दुर्व्यवहार भी किया गया।

कंपनी का संचालन करने वाले विपिन तिवारी, विकास तिवारी और नितेश तिवारी जौनपुर के निवासी बताए जा रहे हैं। उन्होंने मजदूरों को घरेलू काम दिलाने के बहाने रायपुर बुलाया था। लेकिन यहां पहुंचते ही उनके मोबाइल जब्त कर लिए गए और काम के लिए मजबूर किया गया।

हालांकि इस बड़ी कार्रवाई के बावजूद, देर रात तक कंपनी संचालकों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की गई थी, जिससे प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। rescued मजदूरों ने प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की मांग की है।

यह मामला ना सिर्फ मजदूर शोषण का उदाहरण है, बल्कि छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी और जबरन श्रम के एक बड़े नेटवर्क की ओर भी इशारा करता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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