न्यायधानी में न्याय के लिए गुहार लगाने वाली बेबस महिला — सिस्टम की चुप्पी से दागदार हो रही है सरकार की छवि

बिलासपुर की एक शासकीय बैंक की महिला अधिकारी ने एक निजी कंपनी के कर्मचारी पर शादी का झांसा देकर लाखों रुपये हड़पने और शारीरिक शोषण का आरोप लगाया है। मामला गंभीर होने के बावजूद सिविल लाइन्स थाना पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है। पीड़िता की गुहार पर भी कार्रवाई टलती दिख रही है, जिससे न्यायधानी की छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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बिलासपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा की महिला अधिकारी के साथ शादी का झांसा देकर यौन और आर्थिक शोषण का आरोप — शिकायत देने के बाद भी FIR दर्ज नहीं, थाना स्तर पर टालमटोल ने उठाए सवाल।

बिलासपुर।

न्यायधानी बिलासपुर से एक शर्मनाक मामला सामने आया है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब नेशनल बैंक की एक शाखा में पदस्थ महिला अधिकारी ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि सैमुअल कैलाश पॉल, जो एक निजी ऑटोमोबाइल कंपनी में कार्यरत है, ने शादी का झांसा देकर उसके साथ यौन शोषण किया और ₹19,00,000/- (उन्नीस लाख रुपये) की ठगी की।

शिकायत के अनुसार, दोनों के बीच पहचान वर्ष 2021 में हुई थी। आरोपी ने खुद को अविवाहित बताते हुए विवाह का वादा किया, जिस पर भरोसा कर पीड़िता दिसंबर 2022 से आरोपी के साथ बिलासपुर के एक मकान में रहने लगी। समय के साथ आरोपी ने विवाह के बहाने शारीरिक संबंध बनाए और महिला के भरोसे व भावनात्मक जुड़ाव का फायदा उठाते हुए लाखों रुपये हड़प लिए। जब महिला को यह पता चला कि आरोपी पहले से विवाहित है, उसने अपने पैसे लौटाने की मांग की, जिस पर आरोपी ने एक चेक दिया — जो “Insufficient Funds” के कारण बाउंस हो गया।

महिला का कहना है कि यह चेक बाउंस होना आरोपी की धोखाधड़ीपूर्ण नीयत का स्पष्ट प्रमाण है। पीड़िता के पास चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांज़ैक्शन रसीदें और चेक की प्रतियां मौजूद हैं, जिन्हें पुलिस को प्रस्तुत करने की बात कही गई है।

राज्य के मुखिया द्वारा हाल ही में महिलाओं से जुड़े अपराधों में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने के सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद, सिविल लाइन थाना, बिलासपुर के अधिकारी इस गंभीर मामले में अब तक FIR दर्ज करने से बचते दिख रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, जब शिकायतकर्ता ने कार्रवाई की मांग की तो थानेदार ने कहा कि पहले आरोपी और उसके पिता को बुलाकर बातचीत कर ली जाए, फिर आगे की प्रक्रिया देखी जाएगी। इतना ही नहीं, फोन पर भी थानेदार द्वारा पीड़िता को “लड़के से मिलकर मामला सुलझाने” की सलाह दी गई।

यह रवैया न केवल कानून के दायरे से बाहर है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह से न्यायधानी में पीड़ित महिला को न्याय पाने के लिए बार-बार दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं। राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की गंभीरता पर ऐसे मामलों से प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

बिलासपुर में पंजाब नेशनल बैंक की एक अधिकारी के साथ हुए इस आर्थिक और शारीरिक शोषण की शिकायत के बावजूद पुलिस की चुप्पी न केवल व्यवस्था की कमजोरी उजागर करती है, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी गहरा धब्बा छोड़ती है। सिविल लाइन थाना के स्तर पर हो रहा यह टालमटोल न्यायधानी की साख पर सवाल खड़े करता है। आखिर न्याय की इस भूमि पर ऐसा अन्याय कब तक चलता रहेगा?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी आवेदन में आपराधिक तथ्य स्पष्ट रूप से मौजूद हों, तो पुलिस के लिए FIR दर्ज करना कानूनी दायित्व है, विवेकाधिकार नहीं। ऐसे मामलों में देर करना या समझौते का सुझाव देना, न्याय प्रणाली की साख को कमजोर करता है।

अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले की गंभीरता को किस स्तर पर लेता है — क्या कानून के तहत त्वरित कार्रवाई होगी या एक और मामला कागज़ी कार्रवाई में सिमटकर रह जाएगा।

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