सांसों पर संकट! रायपुर-दुर्ग-बिलासपुर में 36% ट्रैफिक जवान फेफड़ों की समस्या से जूझ रहे
प्रदेश के प्रमुख शहरों में सड़कों पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की सेहत पर वायु प्रदूषण का गंभीर असर सामने आया है। रोजाना 8 से 10 घंटे तक व्यस्त चौराहों और नेशनल हाईवे पर ड्यूटी करने वाले जवान जहरीली हवा के सीधे संपर्क में हैं। धूल से उठने वाले पीएम-10 और वाहनों के धुएं से निकलने वाले पीएम-2.5 कण उनके शरीर में प्रवेश कर रहे हैं, जिन्हें विशेषज्ञ फेफड़ों, हृदय और दिमाग के लिए खतरनाक मानते हैं।

रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में किए गए स्वास्थ्य परीक्षण के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। जांच में पाया गया कि बड़ी संख्या में ट्रैफिक जवानों को सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, एलर्जी और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं। करीब 36 प्रतिशत जवानों में संक्रमण जैसे लक्षण पाए गए।
विशेषज्ञों की टीम ने तीनों जिलों में 159 ट्रैफिक कर्मियों का ऑन-द-स्पॉट पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट किया। कई जवानों ने बताया कि उन्हें लंबे समय से सांस फूलने और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं बनी रहती हैं, लेकिन ड्यूटी की मजबूरी के कारण वे इलाज टाल देते हैं। कुछ जवानों ने जांच कराने से भी इनकार किया।
बिलासपुर में परीक्षण किए गए 61 जवानों में से लगभग 34 प्रतिशत में फेफड़ों से संबंधित परेशानी सामने आई। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता वाहन धुआं, सड़क की धूल और पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहन इसकी बड़ी वजह हैं। कई वाहनों में प्रदूषण जांच की अनियमितता और डिजिटल नंबर प्लेट की कमी भी स्थिति को बिगाड़ रही है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर असर सीमित दिखाई देता है। व्यस्त चौराहों पर वायु गुणवत्ता मापने की मशीनें तो लगाई गई हैं, पर यदि मानक से अधिक प्रदूषण दर्ज हो रहा है तो तत्काल प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय रहते ठोस उपाय नहीं किए गए तो ट्रैफिक जवानों के साथ-साथ आम नागरिकों का स्वास्थ्य भी गंभीर खतरे में पड़ सकता है।
-दिलीप जगवानी
