खाकी छोड़ राजनीति में उतरे ये चर्चित IPS अधिकारी, किसी ने संभाली पार्टी की कमान तो कोई बना मंत्री PART -1
भारत में कई ऐसे वरिष्ठ IPS और पुलिस अधिकारी रहे हैं जिन्होंने पुलिस सेवा में शानदार करियर बनाने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) या इस्तीफा देकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इन अधिकारियों ने कानून व्यवस्था संभालने के बाद लोकतंत्र और जनसेवा के दूसरे मंच यानी राजनीति में अपनी नई पहचान बनाई।
के. अन्नामलाई — “सिंघम” IPS से बने बीजेपी के बड़े नेता

तमिलनाडु के चर्चित नेता के. अन्नामलाई 2011 बैच के कर्नाटक कैडर के IPS अधिकारी रहे हैं। अपनी सख्त और ईमानदार पुलिसिंग के कारण उन्हें “सिंघम” कहा जाता था। वर्ष 2019 में उन्होंने इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी जॉइन की और आज तमिलनाडु बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में बड़ी राजनीतिक पहचान बना चुके हैं।
गुप्तेश्वर पांडे — बिहार DGP से राजनीति और फिर अध्यात्म की राह

1987 बैच के IPS अधिकारी गुप्तेश्वर पांडे बिहार के DGP रह चुके हैं। वर्ष 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने VRS लिया और JD(U) पार्टी में शामिल हुए। हालांकि टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने राजनीति से दूरी बनाकर आध्यात्मिक जीवन और कथा वाचन को अपना मार्ग बनाया।
असीम अरुण — पुलिस कमिश्नर से मंत्री तक का सफर

उत्तरप्रदेश के वरिष्ठ IPS अधिकारी असीम अरुण कानपुर के पहले पुलिस कमिश्नर रहे। 2022 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने VRS लेकर बीजेपी जॉइन की। कन्नौज सीट से चुनाव जीतने के बाद वे उत्तरप्रदेश सरकार में मंत्री बने।
आर.एस. प्रवीण कुमार — ADGP पद छोड़ राजनीति में एंट्री

तेलंगाना के वरिष्ठ IPS अधिकारी आर.एस. प्रवीण कुमार ने रिटायरमेंट से 6 वर्ष पहले ही VRS लेकर राजनीति का रास्ता चुना। वे पहले BSP और बाद में BRS पार्टी में शामिल हुए। पुलिस सेवा के दौरान वे सामाजिक और शैक्षणिक सुधारों के लिए भी काफी चर्चित रहे।
इन अधिकारियों की कहानियां बताती हैं कि जनसेवा का रास्ता केवल वर्दी तक सीमित नहीं होता। कई अधिकारी पुलिस सेवा के बाद राजनीति के माध्यम से समाज और देश के लिए काम करने का नया मंच चुनते हैं।
