खाकी से राजनीति तक: IPS छोड़ सत्ता के गलियारों में पहुंचे ये चर्चित चेहरे | Part-2
भारत में कई ऐसे चर्चित IPS अधिकारी रहे हैं जिन्होंने पुलिस सेवा में बड़ा नाम कमाने के बाद राजनीति की राह चुनी। किसी ने पुलिस कमिश्नर की कुर्सी छोड़ी तो किसी ने तेजतर्रार पुलिसिंग की पहचान के बाद जनता की सेवा के लिए राजनीतिक मैदान में कदम रखा। ऐसे ही कुछ चर्चित चेहरों की कहानी एक बार फिर चर्चा में है।
डॉ. सत्यपाल सिंह — मुंबई पुलिस कमिश्नर से केंद्रीय मंत्री तक

1980 बैच के IPS अधिकारी डॉ. सत्यपाल सिंह देश के सबसे चर्चित पुलिस अधिकारियों में गिने जाते हैं। वे मुंबई पुलिस कमिश्नर जैसे अहम पद पर रहे और अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने गए। वर्ष 2014 में उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी जॉइन की। इसके बाद उत्तरप्रदेश की बागपत लोकसभा सीट से सांसद चुने गए और केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली।
आनंद मिश्रा — तेजतर्रार IPS जिन्होंने चुनी राजनीति

2011 बैच के IPS अधिकारी आनंद मिश्रा असम और मणिपुर में अपनी तेज कार्रवाई और दमदार पुलिसिंग के कारण काफी लोकप्रिय हुए। अपराध और उग्रवाद के खिलाफ उनके अभियानों ने उन्हें युवा अधिकारियों में अलग पहचान दिलाई। वर्ष 2023 में उन्होंने इस्तीफा देकर राजनीति में कदम रखा और बाद में बीजेपी से जुड़ गए। उनकी राजनीतिक एंट्री को युवाओं और प्रशासनिक वर्ग में काफी चर्चा मिली।
किरण बेदी — भारत की पहली महिला IPS से उपराज्यपाल तक

भारत की पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी ने अपने करियर में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। वर्ष 2007 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और बाद में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनीं। 2015 में उन्होंने बीजेपी जॉइन कर राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में उन्हें पुडुचेरी का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया। प्रशासनिक सख्ती और अनुशासन के लिए उनकी पहचान आज भी कायम है।
मनोज निनामा — VRS के बाद राजनीति में नई शुरुआत

गुजरात कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी मनोज निनामा ने वर्ष 2026 में VRS लेकर राजनीति का रास्ता चुना। आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक और राजनीतिक विकास को मुद्दा बनाते हुए उन्होंने बीजेपी का दामन थामा। उनके राजनीति में आने को आदिवासी इलाकों में बड़ा राजनीतिक संदेश माना गया।
इन अधिकारियों की कहानियां बताती हैं कि वर्दी छोड़ने के बाद भी जनसेवा का जुनून खत्म नहीं होता। कई अधिकारी राजनीति के माध्यम से समाज और देश के लिए नई भूमिका में काम करना चुनते हैं।
