‘Safe Click 2.0’ अभियान का असर: मेडिकल कॉलेज से योग पार्क तक गूंजा साइबर सुरक्षा का संदेश, ग्वालियर पुलिस ने हजारों लोगों को किया जागरूक
डिजिटल युग में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों से लोगों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा संचालित राज्यव्यापी ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के तहत ग्वालियर जिले में व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के चौथे दिन मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक स्थलों और पार्कों में नागरिकों को साइबर ठगी के नए तरीकों और उनसे बचाव के प्रभावी उपायों की जानकारी दी गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह (IPS) के निर्देशन और अभियान के नोडल अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजावल सिंह जग्गा (IPS) के मार्गदर्शन में जिलेभर में चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
अभियान के तहत जीआर मेडिकल कॉलेज एवं जेएएच समूह में आयोजित विशेष कार्यक्रम में चिकित्सकों, मेडिकल छात्रों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों को साइबर अपराधों की बदलती तकनीकों से अवगत कराया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजावल सिंह जग्गा ने बताया कि साइबर अपराधी अब तकनीक के साथ-साथ लोगों की भावनाओं, डर, लालच और जल्दबाजी का फायदा उठाकर ठगी कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल, ई-मेल, लिंक या मोबाइल एप पर बिना सत्यापन भरोसा नहीं करने की अपील की।
उन्होंने मजबूत पासवर्ड रखने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करने तथा केवल अधिकृत वेबसाइट और मोबाइल एप के माध्यम से ही ऑनलाइन लेन-देन करने की सलाह भी दी।
इसी क्रम में ग्वालियर दुर्ग स्थित योग पार्क में बहोड़ापुर थाना पुलिस ने एक अनूठा साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। सुबह योग करने पहुंचे नागरिकों को संबोधित करते हुए थाना प्रभारी आलोक सिंह परिहार ने कहा कि जैसे योग शरीर और मन को स्वस्थ रखता है, उसी प्रकार साइबर जागरूकता डिजिटल जीवन की सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने लोगों को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर ठगी, क्यूआर कोड स्कैम, व्हाट्सएप हैकिंग, सोशल मीडिया फ्रॉड, ऑनलाइन निवेश और जॉब फ्रॉड, फर्जी बैंक कॉल, डीपफेक वीडियो तथा फिशिंग लिंक जैसे साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाया कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंकिंग जानकारी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें तथा किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की पहले पुष्टि करें।
अभियान के दौरान जिले के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर हजारों नागरिकों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। पुलिस अधिकारियों ने वास्तविक मामलों के उदाहरण देकर लोगों को बताया कि साइबर ठगी की स्थिति में शुरुआती समय यानी ‘गोल्डन आवर’ सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराता है या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करता है, तो ठगी गई राशि को रोकने या वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
ग्वालियर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। किसी भी अनजान ऑफर, कॉल, लिंक या संदेश पर बिना सत्यापन भरोसा न करें और साइबर धोखाधड़ी होने पर बिना समय गंवाए पुलिस को सूचना दें।











