ग्वालियर पुलिस की डिजिटल क्रांति! 650 ई-टैबलेट से लैस हुए विवेचक, अब घटनास्थल से होगी ऑनलाइन जांच
मध्य प्रदेश पुलिस अपराध विवेचना को आधुनिक, तेज और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार तकनीक का उपयोग बढ़ा रही है। इसी क्रम में ग्वालियर जिले के विवेचना अधिकारियों को डिजिटल संसाधनों से सशक्त बनाने के उद्देश्य से 650 ई-टैबलेट वितरित किए गए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से अब पुलिस अधिकारी घटनास्थल से ही ऑनलाइन विवेचना संबंधी कार्यों का निष्पादन कर सकेंगे।
ग्वालियर पुलिस कंट्रोल रूम के सभागार में आयोजित प्रशिक्षण एवं वितरण कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिरीक्षक (IG) ग्वालियर ज़ोन अरविंद कुमार सक्सेना (IPS) ने जिले के सभी सीएसपी, एसडीओपी, थाना प्रभारियों और विवेचना अधिकारियों को ई-टैबलेट वितरित किए। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह (IPS) सहित जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईजी अरविंद कुमार सक्सेना ने कहा कि वर्तमान समय में अपराध अनुसंधान को प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग आवश्यक हो गया है। ई-विवेचना प्रणाली के माध्यम से केस डायरी तैयार करना, आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना, डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित संधारण तथा विवेचना की प्रगति को ऑनलाइन अपडेट करना पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज होगा।
उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक विवेचना अधिकारी नियमित रूप से ई-टैबलेट का उपयोग करे, ताकि जिले में ई-विवेचना प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। साथ ही सीएसपी और एसडीओपी स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए गए।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने कहा कि बदलते समय के अनुरूप टेक्नोलॉजी आधारित पुलिसिंग की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ई-टैबलेट के उपयोग से विवेचना की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार होगा। इसके साथ ही पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनेगी। उन्होंने अधिकारियों से घटनास्थल से ही डिजिटल माध्यमों के जरिए साक्ष्य, दस्तावेज और आवश्यक जानकारी तत्काल अपलोड करने की अपील की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विवेचना अधिकारियों को ई-विवेचना एप्लीकेशन, डिजिटल दस्तावेज प्रबंधन, ऑनलाइन एंट्री और अन्य तकनीकी सुविधाओं के संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार ई-टैबलेट की मदद से अब केस डायरी डिजिटल रूप से तैयार की जा सकेगी, घटनास्थल के फोटो और वीडियो सुरक्षित रूप से अपलोड होंगे तथा जांच से जुड़ी सभी जानकारियां रियल-टाइम में सर्वर पर उपलब्ध रहेंगी। इससे कागजी कार्यवाही में कमी आएगी, रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित रहेगा और न्यायिक प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेजों का सुरक्षित संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।






