साइकिल मैकेनिक की बेटी ने रचा इतिहास! यूपी पुलिस SI अस्मिता डे ने Commonwealth Games में जीता गोल्ड, अब ₹1.5 करोड़ इनाम और बड़ा प्रमोशन

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लखनऊ। मेहनत, संघर्ष और जुनून के दम पर सपनों को हकीकत में बदलने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस की सब-इंस्पेक्टर अस्मिता डे ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देश का नाम रोशन कर दिया। अस्मिता ने जूडो के 48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की है।

अस्मिता की इस ऐतिहासिक जीत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके सम्मान में ₹1.5 करोड़ की प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया है। साथ ही उन्हें यूपी पुलिस में राजपत्रित अधिकारी के पद पर पदोन्नत किए जाने की घोषणा भी की गई है।

जूडो में भारत के लिए रचा इतिहास

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के जूडो मुकाबले में अस्मिता ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में कनाडा की खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी जीत को भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।

अस्मिता वर्तमान में गाजियाबाद कमिश्नरेट में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। खेल के क्षेत्र में उनके शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें पहले भी आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिल चुका है और अब कॉमनवेल्थ गोल्ड के बाद उन्हें राजपत्रित अधिकारी बनाए जाने की घोषणा की गई है।

कांस्टेबल से दरोगा और अब राजपत्रित अधिकारी तक का सफर

अस्मिता ने यूपी पुलिस में खेल कोटे के जरिए कांस्टेबल के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें 23 मार्च 2026 को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर सब-इंस्पेक्टर बनाया गया था।

अब कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनका सफर एक और बड़ी उपलब्धि की ओर बढ़ गया है। सरकार ने उन्हें राजपत्रित अधिकारी बनाने का फैसला किया है।

साइकिल मैकेनिक पिता ने कर्ज लेकर पूरा किया बेटी का सपना

अस्मिता डे की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है। वह मूल रूप से त्रिपुरा की रहने वाली हैं और उनके पिता साइकिल मैकेनिक हैं।

बताया जाता है कि बेटी के खेल करियर को आगे बढ़ाने के लिए उनके पिता ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद कर्ज तक लिया। परिवार के भरोसे और अस्मिता की कड़ी मेहनत ने आखिरकार उनके सपने को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा दिया।

800 मीटर दौड़ से जूडो तक बदली राह

अस्मिता ने शुरुआत में 800 मीटर दौड़ में अपना करियर बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, जिला स्तरीय ट्रायल के दौरान उनका रुझान जूडो की तरफ बढ़ा और उन्होंने खेल की दिशा बदलने का फैसला किया।

इसके बाद लगातार अभ्यास, अनुशासन और संघर्ष के दम पर उन्होंने जूडो में अपनी पहचान बनाई। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल करने के बाद वह यूपी पुलिस का हिस्सा बनीं और अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है।

बेटियों के सपनों को उड़ान देने वाली कहानी

अस्मिता डे की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं बल्कि उन लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर पुलिस की वर्दी पहनने और फिर देश के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने तक का उनका सफर बताता है कि मेहनत, अनुशासन और परिवार का विश्वास मिल जाए तो मुश्किल रास्ते भी मंजिल तक पहुंचा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ₹1.5 करोड़ की प्रोत्साहन राशि और राजपत्रित अधिकारी के पद पर प्रमोशन का ऐलान अस्मिता की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को और खास बना देता है।

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