बच्चों से बुजुर्गों तक, हर उम्र के लिए साइबर ठगों का अलग प्लान, जानिए कैसे बिछाते हैं जाल
रायपुर। साइबर ठगी के मामले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। ठग अब केवल तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों को ही नहीं, बल्कि बच्चों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा युवाओं और बुजुर्गों को भी अलग-अलग तरीकों से निशाना बना रहे हैं। उनकी ठगी का तरीका उम्र, जरूरत, रुचि और लालच के हिसाब से बदल जाता है। कहीं मुफ्त गेम और इनाम का झांसा दिया जाता है, तो कहीं नौकरी, निवेश, बैंक खाते या सरकारी भुगतान के नाम पर लोगों को फंसाया जाता है।
पत्रिका में प्रकाशित खबर के मुताबिक, रायपुर शहर में साइबर ठगी के लिए लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और रुचियों का फायदा उठाया जा रहा है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, फर्जी वेबसाइट, ऑनलाइन भुगतान, नौकरी के विज्ञापन और निवेश योजनाओं के जरिए ठग अलग-अलग वर्गों को निशाना बनाते हैं। ऐसे में हर उम्र के लोगों के लिए साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना जरूरी है।

बच्चों को गेम, वीडियो और इनाम का लालच
अखबार में दी गई जानकारी के अनुसार, 5 से 12 वर्ष के बच्चों को ऑनलाइन गेम, वीडियो और डिजिटल मनोरंजन के जरिए निशाना बनाया जा सकता है। गेम में मुफ्त कॉइन, डायमंड, स्किन या रिवॉर्ड देने का झांसा देकर उनसे भुगतान कराया जाता है। कई बार फर्जी गेमिंग लिंक के माध्यम से पासवर्ड या खाते से जुड़ी जानकारी चुराने की कोशिश भी होती है।
बच्चों को चाहिए कि वे माता-पिता की अनुमति के बिना ऑनलाइन खरीदारी या भुगतान न करें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या गेम में मुफ्त इनाम पाने के लिए निजी जानकारी देने से बचें। अभिभावकों को भी बच्चों के मोबाइल में होने वाली खरीदारी और ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।
किशोरों को फर्जी प्रोफाइल और ब्लैकमेलिंग से खतरा
13 से 17 वर्ष के किशोरों को सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से निशाना बनाया जा सकता है। ठग फर्जी प्रोफाइल बनाकर दोस्ती करते हैं और बाद में निजी फोटो या वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने की कोशिश कर सकते हैं। फर्जी प्रतियोगिताओं, ऑनलाइन गेमिंग और इनाम का लालच देकर भी उन्हें जाल में फंसाया जा सकता है।
किशोरों को सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। किसी की ओर से फोटो या वीडियो वायरल करने की धमकी मिलने पर डरकर पैसे देने के बजाय माता-पिता या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताना चाहिए और पुलिस से मदद लेनी चाहिए।
युवाओं को नौकरी और ऑनलाइन कमाई के नाम पर ठगी
18 से 25 वर्ष के युवाओं को फर्जी नौकरी, इंटरव्यू रजिस्ट्रेशन, प्रशिक्षण शुल्क और इंटर्नशिप के नाम पर ठगा जा सकता है। कई मामलों में घर बैठे ऑनलाइन जॉब, डेटा एंट्री या आसान काम के बदले बड़ी कमाई का लालच दिया जाता है। शुरुआत में छोटी रकम का भुगतान दिखाकर बाद में ज्यादा पैसे जमा करने को कहा जा सकता है।
इसके अलावा, छात्रवृत्ति, प्रवेश परीक्षा और शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले के नाम पर फर्जी वेबसाइटों के जरिए भी धोखाधड़ी की जा सकती है। युवाओं को नौकरी या प्रशिक्षण के नाम पर पैसे देने से पहले संबंधित कंपनी और वेबसाइट की सत्यता जांचनी चाहिए। अनजान लोगों के कहने पर निवेश या ऑनलाइन कमाई की योजनाओं में अपनी जमा पूंजी नहीं लगानी चाहिए।
वयस्कों को बैंकिंग और निवेश के नाम पर निशाना
26 से 45 वर्ष के वयस्कों को बैंक केवाईसी, बिजली बिल, क्रेडिट या डेबिट कार्ड और बैंक खाता बंद होने के फर्जी संदेश भेजकर निशाना बनाया जा सकता है। ठग बैंक कर्मचारी या ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर संपर्क करते हैं और खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।
इसके अलावा, फर्जी ई-चालान, मोबाइल हैकिंग, एपीके फाइल, इंस्टेंट लोन ऐप और शेयर बाजार में निवेश के नाम पर भी ठगी हो सकती है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में ऐप डाउनलोड न करें और न ही बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा करें। निवेश करने से पहले संबंधित संस्था और योजना की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।
बुजुर्गों को भी बनाया जा रहा ठगी का शिकार
साइबर ठग बुजुर्गों को भी अलग-अलग बहानों से निशाना बना सकते हैं। बैंक खाते में समस्या, पेंशन या सरकारी योजना का लाभ, केवाईसी अपडेट और खाते से जुड़ी अन्य परेशानियों का हवाला देकर उनसे निजी जानकारी मांगी जा सकती है। कई बार ठग खुद को बैंक या किसी सरकारी विभाग का कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं।
बुजुर्गों को ऐसे फोन कॉल, संदेश और लिंक से सावधान रहना चाहिए। बैंक संबंधी किसी भी समस्या के लिए बैंक की आधिकारिक शाखा या सत्यापित ग्राहक सेवा माध्यम से ही संपर्क करें। परिवार के सदस्यों को भी उन्हें नए प्रकार की ऑनलाइन ठगी के बारे में जानकारी देते रहना चाहिए।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
रायपुर के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) गौरव मंडल ने अखबार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार लोगों को साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल सहायता लेने की सलाह दी है। ठगी का पता चलते ही 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। जल्द शिकायत करने से संदिग्ध लेनदेन को रोकने या ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि इसकी गारंटी नहीं होती।
साथ ही, अपने बैंक से तुरंत संपर्क कर खाते और संबंधित भुगतान माध्यमों को सुरक्षित कराएं। यूपीआई पिन, ओटीपी, पासवर्ड और कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। मोबाइल और यूपीआई के पासवर्ड बदलें, सक्रिय लॉगिन की जांच करें और जहां संभव हो, दो-स्तरीय सुरक्षा चालू रखें।
साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता है। किसी भी अनजान लिंक, आकर्षक ऑफर, नौकरी के प्रस्ताव या निवेश योजना पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच करें। याद रखें, मुफ्त इनाम, आसान कमाई या तुरंत लाभ का वादा करने वाला हर प्रस्ताव वास्तविक नहीं होता।
