छत्तीसगढ़ से 30 बांग्लादेशी नागरिक वापस भेजे गए, सुरक्षा एजेंसियों ने की बड़ी कार्रवाई

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रायपुर, 15 जुलाई | विशेष संवाददाता

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे 30 बांग्लादेशी नागरिकों को मंगलवार को उनके देश वापस भेज दिया। यह कार्रवाई राज्य भर में चल रहे दस्तावेज़ सत्यापन अभियान के तहत की गई। संबंधित प्रवासियों को रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और रायगढ़ जिलों से पकड़ा गया था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सभी 30 नागरिकों को हवाई मार्ग से गुवाहाटी ले जाया गया, जहां उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सुपुर्द किया जाएगा। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन सभी को बांग्लादेश भेजा जाएगा। यह पूरी कार्रवाई विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि इन व्यक्तियों की पहचान खुफिया सूचनाओं और स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के आधार पर की गई। एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने बताया कि कुछ बांग्लादेशी नागरिकों ने राज्य में भारतीय पासपोर्ट तक हासिल कर लिया था और उसका उपयोग कर वे अपने देश जाकर पुनः भारत लौट आए।

इस मुद्दे को विधानसभा में भाजपा के वरिष्ठ विधायक श्री अजय चंद्राकर ने उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के कई जिलों में बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। चंद्राकर ने कहा कि कई अवैध प्रवासी फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठा रहे हैं, जबकि संबंधित प्रशासनिक तंत्र इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है।

राज्य के गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने जवाब देते हुए बताया कि सरकार ने अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और कार्रवाई के लिए अभियान को तेज कर दिया है। अब तक 19 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं और 40 व्यक्तियों को विदेशी नागरिक अधिनियम के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया है।

गृह मंत्री ने कहा, “गिरफ्तारी के बाद सभी को होल्डिंग सेंटर में रखा गया, जहां से उन्हें कानूनी प्रक्रिया के अनुसार निर्वासित किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के सभी जिलों में मई 2025 के मध्य से विशेष कार्यबल (Special Task Force) गठित की गई है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अवैध प्रवासियों की निगरानी और कार्रवाई हेतु सक्रिय है।

इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण कार्य, टेंट व्यवसाय या कबाड़ व्यवसाय से जुड़े ठेकेदार एवं व्यापारी अपने श्रमिकों के दस्तावेजों का अनिवार्य सत्यापन कराएं। बिना वैध दस्तावेज के श्रमिकों को काम पर रखने वाले नियोक्ताओं पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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