छत्तीसगढ़ में एक और जवान ने खुद को मारी गोली — आखिर क्यों टूट रहे हैं देश के रक्षक?
कोंडागांव जिले के बायनार कैंप में एक CAF जवान द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने सुरक्षा बलों में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। यह घटना एक सप्ताह में दूसरी आत्महत्या है।
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कोंडागांव (छत्तीसगढ़), 4 अगस्त 2025 — छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) के प्लाटून कमांडर दिनेश चंदेला ने रविवार देर रात कोंडागांव जिले के बायनार कैंप में कथित रूप से आत्महत्या कर ली। वह भिलाई के निवासी थे और लंबे समय से बायनार में तैनात थे।
सूत्रों के अनुसार, चंदेला को रात लगभग 10 बजे कैंप परिसर में एक कुर्सी पर बैठे अवस्था में मृत पाया गया। उनके शरीर पर गोली लगने का घाव था। यह गोली उनकी सर्विस राइफल से चली बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल के जवानों ने कैंप की घेराबंदी कर ली और स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
वर्तमान में आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। प्रशासन ने विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
इससे पहले भी हुई थी आत्महत्या की घटना
इस घटना से केवल चार दिन पहले, 30 जुलाई को सीआरपीएफ के जवान पप्पू यादव, जो कि बिहार के भोजपुर जिले के निवासी थे, ने भी बीजापुर जिले के मिंगाचल कैंप में आत्महत्या कर ली थी। यादव छुट्टी से लौटने के बाद 22वीं बटालियन में फिर से शामिल हुए थे। उन्हें बैरक में मृत पाया गया था और उनके गले में इंसास राइफल से चली गोली के निशान थे। इस मामले में भी आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
मनोवैज्ञानिक दबाव और तनाव को लेकर उठे सवाल
लगातार दो जवानों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं ने सुरक्षा बलों में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, और आंतरिक संवाद तंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वरिष्ठ पत्रकार नीरज उइके, जो बस्तर अंचल में लंबे समय से माओवादी संघर्ष को कवर कर रहे हैं, का कहना है,
“बीते कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने माओवादी गतिविधियों के विरुद्ध अहम सफलताएं हासिल की हैं। वरिष्ठ नक्सली नेताओं के सफाए से मनोबल अवश्य बढ़ा है, लेकिन जवानों की आत्महत्या जैसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि मानसिक थकावट और कार्यस्थल का दबाव अब एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।”
प्रशासन और विशेषज्ञों की राय
राज्य पुलिस और CAF प्रशासन ने दोनों घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच की घोषणा की है। अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया है कि मृतक जवान के परिवार को सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी।
वहीं, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि:
कैंप स्तर पर नियमित काउंसलिंग सत्र शुरू किए जाने चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गोपनीय शिकायत तंत्र विकसित किया जाए। हर तैनाती स्थल पर एक मनोवैज्ञानिक अधिकारी या सामाजिक कार्यकर्ता की नियुक्ति की जानी चाहिए। छुट्टी से लौटे जवानों के लिए रीइंटीग्रेशन सपोर्ट मॉड्यूल तैयार किए जाएं।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में तैनात जवानों द्वारा एक सप्ताह के भीतर आत्महत्या की दो घटनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि केवल रणनीतिक विजय पर्याप्त नहीं है — जवानों की मानसिक स्थिरता और भावनात्मक देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है।
सरकार और सुरक्षा संस्थाओं को चाहिए कि वे मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और न केवल शारीरिक सुरक्षा, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा को भी सुनिश्चित करें।
