रायपुर में लागू होगी पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली; मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की घोषणा, नियुक्ति पर प्रक्रिया तेज
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वतंत्रता दिवस पर रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की घोषणा की। इसे साय सरकार के सुशासन की दिशा में ऐतिहासिक और माइलस्टोन कदम माना जा रहा है। संभावना है कि यह पुराने रायपुर पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित आखिरी परेड होगी, क्योंकि भविष्य की गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस परेडें नए राजधानी क्षेत्र के एकात्म पथ पर होंगी। 25 वर्षों के परेड इतिहास के इस मोड़ पर लिया गया यह निर्णय छत्तीसगढ़ राज्य के रजत महोत्सव वर्ष में पुलिसिंग के आधुनिक मॉडल की ओर एक बड़ा बदलाव है।
रायपुर, 15 अगस्त 2025। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली (Police Commissionerate System) लागू करने की घोषणा की। घोषणानुसार, अब रायपुर की कानून-व्यवस्था की कमान एसपी के स्थान पर पुलिस कमिश्नर स्तर के अधिकारी के पास होगी। पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति और संरचना संबंधी आदेश शीघ्र जारी होने की संभावना है।
ऐतिहासिक और रोमांचक माइलस्टोन
यह निर्णय विष्णुदेव साय सरकार के सुशासन की दिशा में ऐतिहासिक, रोमांचक और माइलस्टोन कदम माना जा रहा है। विशेष रूप से इसलिए, क्योंकि संभावना है कि यह पुराने रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित संभवत: आखिरी स्वतंत्रता दिवस परेड होगी। सूत्रों के अनुसार शासन इस बात पर निर्णय की प्रक्रिया में है कि 26 जनवरी 2026, 15 अगस्त 2026 और भविष्य की सभी गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस परेडें अब नए राजधानी क्षेत्र के एकात्म पथ पर आयोजित होंगी।
ऐसे में पुराने रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड पर आयोजित होने वाली परेड का 25 वर्षों का गौरवशाली इतिहास केवल यादों के रूप में शेष रह जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य के रजत महोत्सव वर्ष में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने का यह निर्णय साय सरकार का एक मजबूत, निर्णायक और दूरगामी कदम माना जा रहा है।
क्या बदलेगा—संरचना और अधिकार
योजना के प्रारूप के अनुसार आईजी/एडीजी रैंक के अधिकारी को पुलिस कमिश्नर बनाया जाना प्रस्तावित है। उनके अधीन एडिशनल पुलिस कमिश्नर (एसएसपी स्तर) और आगे डीसीपी/एसीपी रैंक के अधिकारियों की तैनाती रहेगी। प्रारंभिक खाके में 60 से अधिक अधिकारियों का सेटअप माना जा रहा है। कमिश्नरेट व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर को सीआरपीसी की चुनिंदा दंडाधिकारी/निवारक शक्तियाँ मिलती हैं, जिससे धारा 144 जैसी व्यवस्थाएँ लागू करना, लाइसेंसिंग/पब्लिक ऑर्डर पर तेजी से निर्णय लेना संभव होगा। इससे त्वरित निर्णय और जवाबदेही बढ़ेगी।
पृष्ठभूमि
राज्य सरकार ने बड़े शहरों में अपराध-नियंत्रण और त्वरित निर्णय के लिए कमिश्नरेट लाने की दिशा में पहले भी मंथन किया था। इसी वर्ष फरवरी में रायपुर–बिलासपुर में कमिश्नरेट लागू करने की तैयारी की खबरें सामने आई थीं। इसी दिशा में आज मुख्यमंत्री ने घोषणा की है।
पहले से संकेत—स्थानीय डिजिटल मीडिया की रिपोर्टिंग
कमिश्नरेट व्यवस्था के संबंध में एक सक्रिय स्थानीय डिजिटल प्लेटफॉर्म ने पहले ही संकेत दिए थे कि रायपुर में इस प्रणाली पर काम चल रहा है। प्रशासनिक हलकों में इसकी चर्चा लंबे समय से थी और स्थानीय मीडिया कवरेज में यह मुद्दा लगातार उभरता रहा।
अगला कदम—नियुक्ति व शासनादेश
गृह विभाग द्वारा पुलिस कमिश्नर (आईजी/एडीजी रैंक) की नियुक्ति, अधीनस्थ संरचना, सीमांकन/जोनिंग और ट्रांसफर–पोस्टिंग पर औपचारिक शासनादेश (Notification) जारी किया जाएगा। मॉडल सफल होने पर अन्य बड़े शहरों में भी विस्तार की संभावना जताई गई है।
संभावित प्रभाव (विश्लेषण)
कानून-व्यवस्था में त्वरित निर्णय: मजिस्ट्रेटीय शक्तियाँ पुलिस के पास आने से निर्णय-प्रक्रिया छोटी होगी—भीड़-नियंत्रण, आयोजन अनुमति, वीआईपी/रणनीतिक सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन में गति आएगी। एकीकृत कमान: अपराध, ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था की कमान एक छत के नीचे आने से समन्वय बेहतर होगा; जिम्मेदारी और जवाबदेही स्पष्ट होगी। राज्य-स्तरीय नीति संगति: भोपाल–इंदौर, दिल्ली–मुंबई जैसे शहरों की तर्ज़ पर रायपुर में शहरी पुलिसिंग का आधुनिक मॉडल अपनाया जा सकेगा।
डिस्क्लेमर
पुलिस कमिश्नर के नाम/पदस्थापना से संबंधित औपचारिक आदेश जारी होना शेष है। जैसे ही नियुक्ति आदेश अधिसूचित होंगे, MPTnews.in पर विस्तृत अपडेट प्रकाशित किया जाएगा। (घोषणा एवं संरचना-संबंधी तथ्य आधिकारिक/मुख्यधारा मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं।)
