बारिश में भीगा सम्मान: राष्ट्रपति और तीनों सेनाध्यक्षों ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली | 15 अगस्त 2025

79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) का दृश्य इस वर्ष इतिहास में एक विशेष अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। भोर की ठंडी हवाओं और मूसलाधार बारिश के बीच, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू — जो देश की सर्वोच्च सेनापति (Commander-in-Chief of the Armed Forces) भी हैं — ने शहीद वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कोई छाता नहीं, कोई वर्षा-रोधी आवरण नहीं, कोई औपचारिक आडंबर नहीं — केवल भीगते हुए वर्दी, भीगा हुआ सलामी मंच और अदम्य राष्ट्रभक्ति।

राष्ट्रपति के साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान, थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर गीत सिंह भी पूरे सैन्य सम्मान के साथ उपस्थित रहे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। बारिश के बीच सलामी गार्ड ने अनुशासन और दृढ़ता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति को गर्व और भावुकता से भर दिया।

कार्यक्रम के दौरान, दो महिला वायुसेना अधिकारी पुष्पचक्र लेकर स्मारक तक पहुँचीं और राष्ट्रपति के साथ श्रद्धांजलि अर्पण की इस परंपरा को निभाया। स्मारक स्थल पर गूंजते बिगुल और मौन श्रद्धांजलि के बीच उपस्थित हर व्यक्ति ने महसूस किया कि सच्चा सम्मान मौसम या परिस्थितियों का मोहताज नहीं होता।

इस भावनात्मक क्षण की झलक सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गई, जहाँ नागरिकों ने इसे “Goosebumps moment” और “भारत के वीरों के लिए सच्चा सम्मान” जैसे शब्दों में सराहा।

वीरों के सम्मान में राष्ट्रपति की मंज़ूरी

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति ने देश के सैनिकों के शौर्य और सेवाओं के सम्मान में कुल 127 वीरता पुरस्कार और 40 विशिष्ट सेवा पुरस्कार प्रदान करने की मंजूरी दी थी। इनमें शौर्य चक्र, वीर चक्र, कीर्ति चक्र, सेना मेडल (Gallantry), नौसेना मेडल, वायु सेना मेडल (Gallantry) शामिल हैं। इसके अलावा, 290 Mention-in-Despatches भी घोषित किए गए — जिनमें 115 भारतीय सेना, 5 भारतीय नौसेना, 167 भारतीय वायुसेना और 3 बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के कर्मियों को सम्मानित किया गया।

एमपीटी न्यूज़ की टिप्पणी

इस वर्ष का यह स्वतंत्रता दिवस न केवल राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक रहा, बल्कि इसने देशवासियों को यह सिखाया कि जब राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया जाता है, तब हर मौसम और हर कठिनाई केवल उस संकल्प को और अधिक पवित्र बनाती है।

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