नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में ऐतिहासिक दिन — बस्तर में 210 नक्सलियों ने 153 हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण
बस्तर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद समाप्त करने की दिशा में आज का दिन ऐतिहासिक रहा। शासन की पुनर्वास नीति “पुनः मार्गमे” (Puna Margame) योजना के तहत बस्तर क्षेत्र में 210 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में कई सक्रिय कैडर और स्थानीय संगठन सदस्यों (एलओएस) के सदस्य शामिल हैं।

इन नक्सलियों ने पुलिस और प्रशासन के समक्ष अपने हथियार जमा कराए। आत्मसमर्पण करने वालों से कुल 153 हथियार बरामद किए गए हैं। इनमें बंदूकें, भरमार रायफल, पिस्तौल, बम, और बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री शामिल है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थे और शासन की “पुनः मार्गमे” योजना से प्रेरित होकर उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया। उन्हें अब शासन की पुनर्वास योजना के अंतर्गत सहायता और सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

बस्तर रेंज के पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए रोजगार, शिक्षा और पुनर्वास से संबंधित सुविधाएं दी जाएंगी। यह प्रदेश में नक्सलवाद के घटते प्रभाव का बड़ा संकेत है।
यह सामूहिक आत्मसमर्पण न केवल शासन की नीति की सफलता को दर्शाता है, बल्कि इस बात का प्रमाण भी है कि अब बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास का नया अध्याय शुरू हो चुका है। छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त राज्य बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
