पुलिस में तनाव प्रबंधन : म्यूजिक थेरेपी समय की मांग
राज्य में पहली बार राष्ट्रीय स्तर का DG-IG कॉन्फ्रेंस 28–29–30 नवंबर 2025 को नवा रायपुर में आयोजित हुआ है। यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि उस नए स्वरूप का भी प्रतीक है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली के लिए नए मानक निर्धारित किए गए हैं।
पुलिस में तनाव प्रबंधन : म्यूजिक थेरेपी समय की मांग
— राजीव श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त महानिदेशक, छत्तीसगढ़
राज्य में पहली बार राष्ट्रीय स्तर का DG-IG कॉन्फ्रेंस 28–29–30 नवंबर 2025 को नवा रायपुर में आयोजित हुआ है। यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि उस नए स्वरूप का भी प्रतीक है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली के लिए नए मानक निर्धारित किए गए हैं।
पुलिस विभाग के आधुनिकीकरण, उन्नतिकरण, और बहुआयामी सुधारों पर पहले से कहीं अधिक गंभीरता से विचार होने लगा है। इसी से उम्मीद है कि इस वर्ष का DG-IG कॉन्फ्रेंस का निष्कर्ष अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था प्रबंधन और आधुनिक पुलिसिंग पर अनेक ठोस रणनीतियाँ प्रस्तुत करेगा।
लेकिन इन सभी चर्चाओं के केंद्र में जो सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बार-बार उभरता है, वह है जमीनी पुलिस बल का तनाव और उसका समाधान।
जमीनी पुलिस बल — 90% फोर्स, 100% दबाव
थाना स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन उसी बल द्वारा किया जाता है, जो लगभग 90 प्रतिशत सिपाहियों और हवलदारों से निर्मित है।
इन्हीं के कंधों पर—
हर योजना को लागू करने,
हर आदेश को क्रियान्वित करने,
और हर चुनौती से निपटने
का सर्वाधिक भार होता है।

लगातार ड्यूटी, लगातार दबाव और लगातार जनसंपर्क के कारण यह वर्ग मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तनावों से सबसे अधिक प्रभावित होता है। परिणामस्वरूप—
योजनाएँ शिथिल हो जाती हैं
लक्ष्य अधूरे रह जाते हैं
कर्मियों की मानसिक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है
और यही वह वर्ग है जो परिवार, समाज, विभाग और अपराध—चारों दिशाओं का दबाव एक साथ झेलता है।
तनाव के घातक परिणाम
लगातार तनाव और ड्यूटी के दबाव से पुलिसकर्मियों में कई गंभीर समस्याएँ उभरकर सामने आती हैं—
हाई बीपी, डायबिटीज, अनिद्रा, खर्राटों की बीमारी
चिड़चिड़ापन, गुस्सा, अवसाद
समाज व परिवार से दूरी
हिंसक प्रवृत्तियाँ या आत्महत्या का जोखिम
यह स्थिति न केवल एक जिले या राज्य की, बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर की चिंता है।
क्या पारंपरिक उपाय पर्याप्त हैं?
परंपरागत तनाव-निवारण उपाय—
खेलकूद, मनोरंजन कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन, मोटिवेशनल व्याख्यान—
उपयोगी तो हैं, लेकिन पर्याप्त नहीं।

अपने लगभग 38 वर्षों के पुलिस सेवा अनुभव के आधार पर मैं स्पष्ट रूप से कह सकता हूँ—
“पुलिस कर्मियों के तनाव को कम करने में ‘म्यूजिक थेरेपी’ सबसे प्रभावी और कारगर उपाय है।”
म्यूजिक थेरेपी—क्यों सबसे प्रभावी?
हमारे धर्मशास्त्रों में भी संगीत और शक्ति का अद्भुत समन्वय मिलता है
श्रीकृष्ण—बांसुरी की मधुरता और सुदर्शन चक्र के संतुलन का अद्भुत उदाहरण
यह बताता है कि संगीत ही वह माध्यम है जो मन, मस्तिष्क और ऊर्जा को संतुलित करता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से संगीत के लाभ
म्यूजिक थेरेपी—
डोपामिन, सेरोटोनिन, एंडोर्फिन जैसे हैप्पीनेस हार्मोन्स बढ़ाती है
अवसाद, तनाव और चिंता को कम करती है
मस्तिष्क और शरीर को तुरंत शांत करती है
प्रतिरक्षा-तंत्र को मजबूत करती है
कुछ विशेष वाद्ययंत्र पुलिस के लिए अत्यंत उपयोगी
माउथ ऑर्गन (हारमोनिका)
बांसुरी
मेलोडिका
सैक्सोफोन
सीटी वादन
इन वाद्ययंत्रों को बजाने से अनुलोम-विलोम की प्रक्रिया स्वतः संचालित होती है, जो मानसिक शांति और तनाव मुक्ति का अत्यंत कारगर तरीका है।

कोविड काल में भी यह देखा गया कि ऐसे वाद्ययंत्रों का अभ्यास करने वाले लोग बेहतर फेफड़ों की क्षमता के कारण अपेक्षाकृत सुरक्षित रहे।
“तन–मन–रंजन” मॉडल : दोतरफा लाभ
मेरे द्वारा गठित छत्तीसगढ़ हार्मोनिका क्लब (2015) ने पिछले 11 वर्षों से
“तन–मन–रंजन” नामक साप्ताहिक कार्यक्रम के माध्यम से हज़ारों लोगों को संगीत-आधारित तनावमुक्ति प्रदान की है।
इस प्रयोग से पाया गया—
वादक और श्रोता दोनों के तन-मन में हैप्पीनेस हार्मोन्स बढ़ते हैं
वातावरण सकारात्मक, उल्लासपूर्ण और शांतिमय बनता है
यह मॉडल पुलिस कर्मियों के लिए तुरंत उपयोगी और प्रभावी सिद्ध हो सकता है
पुलिस–पब्लिक सांस्कृतिक क्लब : सफलता के उदाहरण
अपने सेवा काल में विभिन्न जिलों में स्थापित किए गए इन क्लबों से—
पुलिस कर्मियों का तनाव कम हुआ
समाज और पुलिस के बीच विश्वास बढ़ा
साम्प्रदायिक तनाव के दौरान समुदायों के कलाकार “शांति दूत” बनकर आगे आए
दंगा-फसाद रोकने में उल्लेखनीय सहयोग मिला
“पुलिस रिदम हाउस” : एक अत्यन्त आवश्यक व्यवस्था
हर जिले में कम से कम एक पुलिस रिदम हाउस की स्थापना की जा सकती है—
साउंडप्रूफ म्यूज़िक हॉल
ड्रम, कांगो, बोंगो, कैजन, जेम्बे जैसे बीट वाद्ययंत्र
जहाँ तनावग्रस्त पुलिसकर्मी—
खुलकर ड्रम बजाएँ
नाचें, उछलें
अपनी झल्लाहट और रोष को बीट्स में निकालें
यह ड्रम थेरेपी नकारात्मक ऊर्जा को तेजी से बाहर निकाल देती है और कर्मी तरोताजा हो जाते हैं।
निष्कर्ष : पुलिस के लिए म्यूजिक थेरेपी—समय की सबसे बड़ी मांग
पुलिस बल को मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त किए बिना
कानून-व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता।
इसलिए—
पुलिस विभाग में तनाव प्रबंधन हेतु म्यूजिक थेरेपी को
सुव्यवस्थित कार्यक्रम, सिलेबस, समय-सारणी और प्रशिक्षित विशेषज्ञों के साथ
अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए।
यदि नवा रायपुर में होने वाले DGP–IG कॉन्फ्रेंस में इस विषय पर गंभीरता से विचार होता है,
तो यह न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश की पुलिसिंग व्यवस्था के लिए
एक ऐतिहासिक और स्वागतयोग्य निर्णय होगा।
