शहीद IPS विनोद कुमार चौबे: नक्सल विरोधी अभियान के अमर नायक

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छत्तीसगढ़।
देश की आंतरिक सुरक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर अधिकारियों में शहीद आईपीएस विनोद कुमार चौबे का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। वे छत्तीसगढ़ पुलिस में राजनांदगांव जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत थे और नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व करने वाले अधिकारी माने जाते थे।

ज़मीन से जुड़े, मैदान में रहने वाले अधिकारी

विनोद कुमार चौबे केवल आदेश जारी करने वाले अधिकारी नहीं थे, बल्कि स्वयं जंगलों में उतरकर जवानों के साथ अभियान का नेतृत्व करते थे। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उन्होंने स्थानीय पुलिस, विशेष बलों और खुफिया तंत्र के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कई अभियानों को अंजाम दिया।
उनका स्पष्ट मानना था कि अधिकारी का वास्तविक स्थान फाइलों के पीछे नहीं, बल्कि अपने जवानों के बीच मैदान में होता है।

मदनवाड़ा नक्सली हमला: देश को झकझोर देने वाली घटना

राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा जंगल में नक्सलियों द्वारा थाना पर हमला किए जाने की सूचना मिलते ही एसपी विनोद चौबे स्वयं पुलिस दल के साथ मौके के लिए रवाना हुए।
जंगल के भीतर पहले से घात लगाए बैठे नक्सलियों ने भूमिगत विस्फोटकों और चारों ओर से की गई भारी गोलीबारी से पुलिस बल को घेर लिया।

इस भीषण हमले में एसपी विनोद कुमार चौबे सहित लगभग 29 पुलिसकर्मी शहीद हो गए। यह घटना उस समय छत्तीसगढ़ में नक्सलियों द्वारा किया गया सबसे घातक हमला मानी गई, जिसने पूरे देश को गहरे शोक में डुबो दिया।

शहादत का संदेश

शहीद विनोद चौबे ने पीछे रहकर निर्देश देने के बजाय आगे बढ़कर नेतृत्व करना चुना। उनकी शहादत यह संदेश देती है कि देश की आंतरिक सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारी भी उतने ही साहसी और बलिदानी होते हैं जितने सीमा पर तैनात सैनिक।

सर्वोच्च वीरता का सम्मान

भारत सरकार ने उनके अद्वितीय साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया। यह शांतिकाल में दिया जाने वाला देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।

स्मृति और प्रेरणा

आज भी छत्तीसगढ़ पुलिस शहीद विनोद कुमार चौबे को कर्तव्य, साहस और नेतृत्व की मिसाल के रूप में याद करती है। उनकी स्मृति में प्रतिमाएं, स्थानों के नामकरण और वार्षिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। नए पुलिस अधिकारी और जवान उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सेवा पथ पर आगे बढ़ते हैं।

निष्कर्ष

शहीद आईपीएस विनोद कुमार चौबे केवल एक अधिकारी नहीं थे, बल्कि राष्ट्रभक्ति, साहस और कर्तव्यपरायणता का जीवंत प्रतीक थे। उनकी शहादत हमें यह याद दिलाती है कि देश की सुरक्षा सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि जंगलों, गांवों और आंतरिक मोर्चों पर भी लड़ी जाती है।

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