जेल में रचा गया इतिहास: रायपुर सेंट्रल जेल के कैदी ने गीता के 700 श्लोक कंठस्थ कर बना दिया नया रिकॉर्ड

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रायपुर सेंट्रल जेल में बंद एक कैदी ने वह कर दिखाया है, जो अब तक देश की किसी भी जेल में नहीं हुआ था। कैदी ने श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्यायों के कुल 700 श्लोक पूरी तरह कंठस्थ कर लिए हैं। यही नहीं, वह बिना पुस्तक देखे संस्कृत में श्लोकों का पाठ करने के साथ-साथ उनका भावार्थ भी स्पष्ट रूप से समझा देता है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे “गीता परिवार” का अहम योगदान रहा है, जो बीते पांच वर्षों से जेलों में नियमित रूप से गीता की कक्षाएं संचालित कर रहा है। रायपुर, भिलाई, दुर्ग और अन्य जेलों में चल रही इन कक्षाओं के माध्यम से कैदियों को आध्यात्मिक शिक्षा दी जा रही है, जिससे वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

गीता परिवार की स्थापना अयोध्या स्थित राम मंदिर के ट्रस्टी गोविंद देव गिरि महाराज द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति और भगवद्गीता की शिक्षाओं को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। आज यह अभियान देश-विदेश के 180 से अधिक देशों और भारत के कई राज्यों में अनेक भाषाओं में संचालित हो रहा है।

रायपुर सेंट्रल जेल में गीता कक्षाओं के दौरान कैदी ने करीब एक वर्ष तक लगातार अध्ययन और अभ्यास किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने पूरे समर्पण के साथ गीता के श्लोकों को याद किया और परीक्षा में सफलता प्राप्त कर पहली बार किसी जेल में “प्रथम गीतावती” बनने का गौरव हासिल किया।

जेल प्रशासन के अनुसार, गीता कक्षाओं से कैदियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। इससे न केवल आत्मशुद्धि होती है, बल्कि वे समाज में बेहतर इंसान बनकर लौटने की प्रेरणा भी प्राप्त कर रहे हैं।

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