बिलासपुर रेंज में ‘मरणासन्न कथन’ पर ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित, विवेचना को त्रुटिहीन बनाने पर जोर
गंभीर अपराधों की विवेचना को और अधिक प्रभावी एवं कानूनी रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज में ‘मरणासन्न कथन’ (Dying Declaration) विषय पर रेंज स्तरीय एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज श्री राम गोपाल गर्ग (IPS) के मार्गदर्शन में किया गया।

Conviction Rate बढ़ाने पर विशेष फोकस
इस विशेष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य गंभीर मामलों की जांच में त्रुटियों को कम करना और न्यायालयों में सजा के प्रतिशत (Conviction Rate) को बढ़ाना था। कार्यशाला में “मरणासन्न कथन, कानूनी प्रक्रिया, सावधानियां एवं विवेचकों के लिए दिशा-निर्देश” विषय पर विस्तृत चर्चा की गई।
शासकीय अधिवक्ता ने दी कानूनी जानकारी
कार्यक्रम में मुंगेली के शासकीय अधिवक्ता श्री रजनीकांत ठाकुर ने पुलिस अधिकारियों को मरणासन्न कथन से जुड़े कानूनी पहलुओं, न्यायालयीन महत्व और विवेचना के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कई गंभीर मामलों में Dying Declaration न्यायालय में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होता है, इसलिए इसे पूरी कानूनी प्रक्रिया और संवेदनशीलता के साथ दर्ज किया जाना बेहद जरूरी है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली ने किया संचालन
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली श्री भोजराम पटेल द्वारा किया गया। इस दौरान उन्होंने शासकीय अधिवक्ता श्री रजनीकांत ठाकुर को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया।
बिलासपुर रेंज की इस पहल को पुलिस अधिकारियों की जांच क्षमता और कानूनी समझ को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
