राजनांदगांव में ₹5.41 लाख की साइबर ठगी के म्यूल अकाउंट का खुलासा, 58 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार
राजनांदगांव पुलिस ने साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। साइबर सेल राजनांदगांव और थाना सिटी कोतवाली की संयुक्त टीम ने जांच के दौरान ऐसे बैंक खाते की पहचान की, जिसके माध्यम से साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त ₹5,41,099 की राशि को प्राप्त करने और आगे हस्तांतरित करने का मामला सामने आया।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश और जांच जारी है।

साइबर ठगी की रकम के लिए इस्तेमाल हुआ बैंक अकाउंट
भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की जांच शुरू की थी।
जांच में सामने आया कि संबंधित बैंक खातों का उपयोग साइबर धोखाधड़ी से अर्जित ₹5,41,099 की अवैध धनराशि को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया गया था। पुलिस के अनुसार, खाताधारकों और सहयोगियों द्वारा यह जानते हुए भी राशि प्राप्त एवं उपयोग की जा रही थी कि यह धोखाधड़ी से अर्जित धन है।
पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया
मामले में थाना सिटी कोतवाली राजनांदगांव में अपराध क्रमांक 562/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(4), 317(5) और 3(5) में अपराध दर्ज किया गया।
विवेचना के दौरान 20 सितंबर 2026 को आरोपी दीपक शर्मा, पिता स्व. मुरलीधर शर्मा, उम्र 58 वर्ष, निवासी मुरूम खदान लखोली अटल आवास, थाना कोतवाली, जिला राजनांदगांव को पूछताछ के लिए बुलाया गया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया और न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने, दूसरे खातों में ट्रांसफर करने या निकालने के लिए करते हैं।
कई मामलों में अपराधी कमीशन या आर्थिक लाभ का लालच देकर किसी व्यक्ति का बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं। ठगी की रकम पहले इस खाते में पहुंचती है और फिर उसे कई दूसरे खातों में भेज दिया जाता है। इससे धनराशि के वास्तविक स्रोत का पता लगाना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल बनाने की कोशिश की जाती है।
किन लोगों को बनाया जाता है म्यूल अकाउंट का हिस्सा?
म्यूल अकाउंट के मामलों में अलग-अलग तरह के लोग शामिल हो सकते हैं। इनमें ऐसे लोग भी हो सकते हैं जिन्हें अपने खाते के गलत इस्तेमाल की जानकारी नहीं होती, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कमीशन का लालच देकर फंसाया जा सकता है और कुछ लोग जानबूझकर साइबर अपराधियों को अपने खाते उपलब्ध कराते हैं।
बैंक अकाउंट किराये पर देना पड़ सकता है भारी
राजनांदगांव पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक अकाउंट, ATM कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम इस्तेमाल करने के लिए न दें। किसी भी कमीशन या बड़ी रकम के लालच में अपना बैंक खाता उपलब्ध कराने से बचें और अपने खाते के लेनदेन की नियमित निगरानी करें।
पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी म्यूल खातों का इस्तेमाल गेमिंग एप, गैंबलिंग एप, फर्जी ट्रेडिंग एप, सेक्सटॉर्शन, डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर ठगी में कर सकते हैं। खाता किराये पर देना, कमीशन पर उपलब्ध कराना या बेचना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
किसी खाते में संदिग्ध लेनदेन दिखाई देने पर तत्काल पुलिस या साइबर सेल को इसकी जानकारी देने की अपील की गई है।
पुलिस टीम की रही सराहनीय भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक उपेंद्र कुमार शाह, साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक विनय पम्मार, उप निरीक्षक सुमेन्द्र खरे, प्रधान आरक्षक जी. सिरिल कुमार और साइबर सेल राजनांदगांव की टीम की भूमिका रही।
