बंदूक छोड़ थामी कलम: बस्तर के 8 पूर्व माओवादियों ने पास की 10वीं, गीता नरोटे समेत 3 फर्स्ट डिविजन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व माओवादी कैडरों ने शिक्षा के क्षेत्र में नई शुरुआत की है। आठ पूर्व माओवादियों ने छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के माध्यम से 10वीं की परीक्षा पास की है। इनमें गीता नरोटे, अर्जुन ओयाम और संतोष आंचला ने फर्स्ट डिविजन हासिल किया है। परीक्षा अगस्त 2026 में आयोजित हुई थी और परिणाम सितंबर में घोषित किए गए।

210 माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद शुरू हुई पढ़ाई

रिपोर्टों के अनुसार, यह उपलब्धि उन कैडरों की है जिन्होंने आत्मसमर्पण के बाद दोबारा पढ़ाई शुरू की। गीता नरोटे उन 210 माओवादी कैडरों के समूह में शामिल थीं, जिसने वरिष्ठ कैडर रूपेश के नेतृत्व में अक्टूबर 2025 में जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया था। पुनर्वास प्रक्रिया के तहत शिक्षा और कौशल विकास पर भी सहायता दी जा रही है।

गीता नरोटे का सपना, अब नर्स बनना है

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की रहने वाली गीता नरोटे ने बचपन में ही पढ़ाई छोड़ दी थी। उनके पिता की हत्या के बाद उन्होंने छठी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी और परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में वह माओवादी संगठन से जुड़ गईं और संगठन की मेडिकल टीम में काम करने के कारण ‘डॉ. चंपा’ के नाम से जानी गईं।

आत्मसमर्पण के बाद गीता ने दोबारा पढ़ाई शुरू की और 10वीं की परीक्षा फर्स्ट डिविजन से पास की। अब उनका लक्ष्य आगे की पढ़ाई पूरी कर नर्स बनना है। रिपोर्ट के मुताबिक, आत्मसमर्पण नीति के तहत मिली सहायता राशि में से उन्होंने किताबें और पढ़ाई की सामग्री भी खरीदी।

अर्जुन ओयाम बनना चाहते हैं शिक्षक

अर्जुन ओयाम ने भी 10वीं की परीक्षा फर्स्ट डिविजन से पास की है। वह बीजापुर जिले के तोड़का गांव से हैं। माओवादी संगठन से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने राजनीतिक स्कूल में पढ़ाई की और बाद में वहां बुनियादी गणित, हिंदी और पर्यावरण जैसे विषय पढ़ाए।

आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने दोबारा औपचारिक शिक्षा शुरू की। अब अर्जुन अपनी पढ़ाई आगे जारी रखना चाहते हैं और भविष्य में अपने गांव में शिक्षक बनने का लक्ष्य रखते हैं।

संतोष आंचला की पढ़ाई के साथ खेती और कारोबार की योजना

संतोष आंचला उर्फ सन्नू, 31, भी फर्स्ट डिविजन से 10वीं पास करने वालों में शामिल हैं। वह कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा क्षेत्र से हैं। उन्होंने कम उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी और बाद में माओवादी संगठन से जुड़े। संगठन में रहते हुए उन्होंने युवा कैडरों को बुनियादी गणित और हिंदी पढ़ाई।

अब संतोष आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं। उनकी योजना पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती और कारोबार से जुड़ने की है।

8 पूर्व माओवादियों ने पास की 10वीं

रिपोर्टों के अनुसार, बस्तर संभाग से परीक्षा पास करने वाले आठ लोगों में गीता नरोटे, यादगिरी कोंडघाटला उर्फ भास्कर, संतोष आंचला उर्फ सन्नू, रामधर कश्यप, मडकम डुल्ला, नवरू पोयम, अर्जुन पायम उर्फ वासु और रामजी गावड़े शामिल हैं। इन उम्मीदवारों ने जगदलपुर, बीजापुर और कांकेर से ओपन स्कूल परीक्षा दी थी।

इनमें पूर्व दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य भास्कर के भी फर्स्ट डिविजन से पास होने की अलग रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, गीता, अर्जुन और संतोष के तीन नामों को फर्स्ट डिविजन के रूप में Indian Express की रिपोर्ट और उसके आधार पर प्रकाशित अन्य रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से बताया गया है।

शिक्षा को पुनर्वास प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया

बस्तर पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने पढ़ाई जारी रखने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद उन्हें शिक्षा से जुड़ी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई। बस्तर एसपी शलभ कुमार सिन्हा ने कहा कि शिक्षा उन्हें समाज से दोबारा जुड़ने और भविष्य में रोजगार या स्वरोजगार के अवसर तलाशने में मदद कर सकती है।

इन पूर्व माओवादी कैडरों के लिए 10वीं पास करना सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि लंबे अंतराल के बाद औपचारिक शिक्षा में वापसी का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब उनके सामने आगे की पढ़ाई, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के नए रास्ते हैं।

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