क्या एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य से आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है? जानिए इंटर-स्टेट गिरफ्तारी के नियम

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भारत में कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं जब किसी अपराध का आरोपी दूसरे राज्य में छिपा होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जाकर आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है। हाल ही में शिमला में यूथ कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच विवाद के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया था।

कानूनी रूप से देखा जाए तो भारत में एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जाकर आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन इसके लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है। पहले यह प्रक्रिया Code of Criminal Procedure (CrPC) 1973 के तहत तय थी, जबकि अब नया कानून Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) लागू होने के बाद भी लगभग यही नियम लागू हैं। इसके अलावा गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने D.K. Basu बनाम राज्य पश्चिम बंगाल मामले में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।

इंटर-स्टेट गिरफ्तारी के मुख्य नियम

इंटर-स्टेट गिरफ्तारी का पहला नियम यह है कि जिस राज्य में आरोपी को गिरफ्तार करना है, वहां की स्थानीय पुलिस को पहले सूचना देना जरूरी होता है। कई मामलों में गिरफ्तारी के दौरान स्थानीय पुलिस की मौजूदगी भी आवश्यक मानी जाती है ताकि कानूनी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

दूसरा महत्वपूर्ण नियम यह है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी को उसी राज्य के नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना पड़ता है। इसके बाद पुलिस को ट्रांजिट रिमांड लेना होता है। ट्रांजिट रिमांड एक कानूनी अनुमति होती है, जिसके आधार पर आरोपी को दूसरे राज्य में जांच के लिए ले जाया जा सकता है।

तीसरा नियम यह है कि गिरफ्तारी से जुड़ी पूरी जानकारी स्थानीय थाने की डायरी में दर्ज की जाती है। साथ ही गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारियों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए, उनके पास पहचान पत्र होना चाहिए और उन्हें अपनी पहचान बतानी होती है।

आरोपी के भी होते हैं कुछ अधिकार

गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के कुछ कानूनी अधिकार भी होते हैं। उसे गिरफ्तारी का कारण बताया जाना चाहिए और उसे अपने परिवार या वकील को सूचना देने का अधिकार होता है। ये सभी प्रावधान नए कानून Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita में भी लागू हैं।

नियमों का पालन न होने पर क्या हो सकता है?

यदि इंटर-स्टेट गिरफ्तारी में तय नियमों का पालन नहीं किया जाता, तो ऐसी गिरफ्तारी को अवैध माना जा सकता है। इस स्थिति में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है। स्थानीय पुलिस उन पर अपहरण, गैरकानूनी हिरासत या गलत तरीके से किसी को बंधक बनाने जैसे आरोप भी दर्ज कर सकती है।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन अदालत की अवमानना भी माना जा सकता है। ऐसे मामलों में विभागीय जांच, निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। यही वजह है कि इंटर-स्टेट गिरफ्तारी के मामलों में पुलिस को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना बेहद जरूरी होता है।

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