कोण्डागांव के कोनगुड़ में बदली तस्वीर: कभी माओवाद का गढ़, अब युवाओं को रोजगार देने वाला कौशल केंद्र

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कोण्डागांव। जिले के सुदूर और माओवाद प्रभावित क्षेत्र कोनगुड़ में अब विकास और रोजगार की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। यहां नीति आयोग के सहयोग से आकांक्षा ग्रामीण कौशल एवं नवाचार केंद्र विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं और पुनर्वासित लोगों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण देकर रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ना है।

इस केंद्र के जरिए हर साल करीब 1,000 से 1,500 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने और 300 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। गुरुवार को कांकेर सांसद भोजराज नाग और विधायक नीलकंठ टेकाम ने केंद्र का निरीक्षण कर वहां चल रहे प्रारंभिक प्रशिक्षण और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

माओवाद प्रभावित क्षेत्र में रोजगार की नई शुरुआत

सांसद भोजराज नाग ने कहा कि जिस इलाके की पहचान कभी माओवादी गतिविधियों के कारण होती थी, वहां अब पुनर्वासित लोगों के साथ विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। उन्होंने युवाओं से कौशल हासिल कर आत्मनिर्भर बनने और देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा कि आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे लोगों ने दोबारा हिंसा के रास्ते पर नहीं जाने का संकल्प लिया है। कोनगुड़ में कौशल और रोजगार का केंद्र शुरू होना इस बदलाव का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

शुरुआती चरण में 100 लोगों को प्रशिक्षण

कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना के अनुसार केंद्र के प्रारंभिक चरण में 100 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें 85 महिलाएं और 4 आत्मसमर्पित व्यक्ति शामिल हैं। केंद्र का प्रमुख उद्देश्य जिले के पुनर्वासित लोगों और उनके परिवारों को रोजगार के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा ने बताया कि पुनर्वास नीति के तहत पुनर्वासित लोगों को कोनगुड़ का भ्रमण कराया गया, ताकि वे यहां संचालित गतिविधियों को देखकर रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित हों।

154 आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों ने लिया शिविर का लाभ

केशकाल, धनोरा, इरागांव और उरंदाबेड़ा थाना क्षेत्रों के करीब 154 आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों ने भी शिविर का लाभ लिया। इनमें से 45 से अधिक लोगों ने प्रशिक्षण लेने पर सहमति जताई है। इन्हें आने वाले दिनों में कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण से युवतियों में बढ़ा आत्मविश्वास

केंद्र में प्रशिक्षण ले रही युवतियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कोनगुड़ की पार्वती मरापी केंद्र में स्टोर रूम का काम सीख रही हैं। वहीं कल्पना पटेल ने बताया कि पहले वह खेती-किसानी करती थीं, लेकिन प्रशिक्षण और काम का अवसर मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पहली सैलरी अपनी मां को देने की इच्छा है।

आत्मसमर्पण के बाद मुख्यधारा में लौटे रजनू कोर्राम ने बताया कि उन्होंने करीब 13 वर्ष जंगल में बिताए। आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास केंद्र में तीन महीने का प्रशिक्षण लेने के बाद अब वह कोनगुड़ आकर प्रशिक्षण देने का काम कर रहे हैं।

PPP मॉडल से मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार

आकांक्षा ग्रामीण कौशल एवं नवाचार केंद्र को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) आधारित रोजगार मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना और NAPS के तहत पंजीयन की प्रक्रिया जारी है।

परियोजना के तहत प्रतिवर्ष 1,000 से 1,500 युवाओं को प्रशिक्षण, पात्र अभ्यर्थियों को अधिकतम 100 प्रतिशत प्लेसमेंट और गारमेंट उत्पादन इकाई के माध्यम से 300 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है।

कभी माओवादी गतिविधियों के लिए चर्चित रहे कोनगुड़ में अब कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार की गतिविधियां शुरू होना क्षेत्र में बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह पहल स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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