छत्तीसगढ़ आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा में ड्रेस कोड को लेकर बवाल, छात्रों का फूटा गुस्सा
छत्तीसगढ़ की आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा में ड्रेस कोड, कलावा और समय सीमा को लेकर छात्रों को परीक्षा केंद्रों से लौटाया गया। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और अभ्यर्थियों ने फिर से परीक्षा आयोजित करने की मांग की।
रायपुर | MPTnews.in
छत्तीसगढ़ में आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा देने गए हजारों युवाओं का सामना उस सख़्ती से हुआ, जिसे देखकर कई जगहों पर ग़ुस्सा, बेबसी और अफ़सोस तीनों झलक उठे। किसी को शर्ट काटकर आधी करवानी पड़ी, किसी का कलावा उतरवाया गया, तो किसी को सिर्फ नाम में अंतर की वजह से परीक्षा केंद्र के बाहर ही रोक दिया गया।
शायद इस परीक्षा में योग्यता कम, और कपड़े, रंग, नाम और समय का ज़्यादा मूल्यांकन हो रहा था।
कलावा… शर्ट… और फिर विरोध
जशपुर से लेकर सूरजपुर, बिलासपुर से खैरागढ़ – परीक्षा केन्द्रों पर हालात ऐसे दिखे जैसे सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर अभ्यर्थियों की मानसिक परीक्षा ली जा रही हो।
किसी के हाथ का कलावा काटा गया, और जब उसने विरोध किया तो उसे हिंदू आस्था का अपमान महसूस हुआ। कुछ लड़कों को उनकी पूरी बांह की शर्ट को आधी करवाने कहा गया। वीडियो में एक परीक्षार्थी को टेलर के पास जाकर शर्ट कटवाते देखा गया। सोचिए, एक सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा देने आए छात्र को परीक्षा से ठीक पहले ये करना पड़ा! खैरागढ़ में तो बात इतनी बढ़ गई कि परीक्षार्थियों ने कलेक्टर निवास तक पहुंचकर प्रदर्शन किया। ग़ुस्सा जायज़ था — क्योंकि जिन नियमों की जानकारी कुछ को मिली थी, वहीं बाकी छात्र इससे अनभिज्ञ थे।
बिलासपुर में समय पर पहुंचने के बाद भी बाहर कर दिए गए छात्र
बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज परीक्षा केंद्र में कई ऐसे छात्र पहुंचे जिन्होंने समय पर प्रवेश के बावजूद गेट पर ही रोक दिया गया। वजह? प्रवेश पत्र और SMS में अलग-अलग समय दर्ज था।
Vyapam की ओर से भेजे गए संदेश और प्रवेश पत्रों में तालमेल नहीं था, लेकिन इसकी सज़ा उन छात्रों को मिली जो शायद पहली बार किसी सरकारी परीक्षा में शामिल हो रहे थे।
एक नाम की चूक, और सपना अधूरा
जांजगीर की एक छात्रा का उदाहरण बेहद दुखद था — उसके आधार कार्ड और प्रवेश पत्र में नाम के अक्षरों में मामूली अंतर था। उसने हाथ जोड़कर विनती की, दूसरे डॉक्युमेंट्स भी दिखाए, लेकिन उसे परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया।
उसकी आंखें भरी थीं। सपनों से भरी। लेकिन उस दिन, वो भीगते आसमान तले खामोशी से लौट गई।
प्रशासन का जवाब — नियम सबके लिए समान हैं
Vyapam और स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि यह सख़्ती पूर्व में हुई नकल की घटनाओं को रोकने के लिए की गई है।
खैरागढ़ की नोडल अधिकारी रेणुका रात्रे का बयान आया कि नियमों की जानकारी पहले से वेबसाइट और सूचना पर्चों में थी।
पर क्या यह सुनिश्चित किया गया था कि हर छात्र — खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आए हुए — उन्हें सही से पढ़ पाए?
एक सवाल जो रह गया — क्या ये इंसाफ था?
सरकारी परीक्षा में सख्ती होनी चाहिए, लेकिन ऐसी नहीं कि एक साधारण युवा खुद को बेगुनाह होकर भी संदिग्ध महसूस करे।
क्या एक शर्ट की बांह तय करती है कि कोई नकल करेगा या नहीं? क्या कलावा पहनने से परीक्षा का निष्पक्षता बिगड़ जाती है? क्या सूचना के नाम पर जिम्मेदारी सिर्फ परीक्षार्थी की है, न कि परीक्षा मंडल की?
अब मांग उठ रही है — फिर से परीक्षा हो
छात्र संगठनों, परिजनों और प्रभावित अभ्यर्थियों ने मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया की जांच हो और उन लोगों को दोबारा मौका मिले जो सिर्फ तकनीकी या ड्रेस कोड की वजह से परीक्षा नहीं दे सके।
MPTnews.in की राय
सरकारी नौकरी आज भी करोड़ों युवाओं के लिए सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि इज्जत की लड़ाई है। जब किसी युवा को परीक्षा देने से वंचित किया जाता है, तो सिर्फ एक मौका नहीं छीनता — वो आत्मविश्वास, मेहनत और उम्मीद सब पर सवाल बनकर बैठ जाता है।
नियम ज़रूरी हैं, लेकिन उनमें इंसानियत की गुंजाइश होनी चाहिए।
