वर्दी में ममता की मूर्ति: शराब कार्रवाई के दौरान SDOP आकांक्षा जैन ने रोते शिशु को गोद में लेकर जीता दिल
दतिया। अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के दौरान अक्सर पुलिस को विरोध, पत्थरबाज़ी और भावनात्मक दबाव जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कहीं महिलाएं पुरुष पुलिसकर्मियों से उलझ जाती हैं, तो कहीं बच्चों को आगे कर कार्रवाई रोकने की कोशिश होती है। लेकिन जब मोर्चे पर महिला अधिकारी होती हैं, तो नज़ारा ही बदल जाता है—पूरा माहौल शांत हो जाता है।
दतिया जिले के चिरूला थाना क्षेत्र के ग्राम फुलरा में हुई कार्रवाई के दौरान एसडीओपी आकांक्षा जैन ने ऐसा ही उदाहरण पेश किया, जिसने खाकी वर्दी की गरिमा को और ऊंचा कर दिया। कार्रवाई के दौरान उन्हें एक घर की छत पर ठंड से कांपता और भूख से रोता एक शिशु मिला, जो किसी अपराध का हिस्सा नहीं था—बस ममता की तलाश में था।
उस क्षण आकांक्षा जैन केवल पुलिस अधिकारी नहीं रहीं, बल्कि एक मां बन गईं। उन्होंने बच्चे को गोद में उठाया, उसे गर्म कपड़े पहनाए और अपने हाथों से दूध पिलाया। कुछ ही देर में बच्चे की रुलाई थम गई और डर खत्म हो गया, मानो उसे सुरक्षा का एहसास हो गया हो।
यह दृश्य किसी पुलिस कार्रवाई का नहीं, बल्कि इंसानियत की जीत का था। यह घटना बताती है कि जब कानून के साथ संवेदनशीलता जुड़ती है, तब वर्दी केवल सख्ती का प्रतीक नहीं रहती, बल्कि भरोसे और ममता की पहचान बन जाती है।
दतिया की यह तस्वीर और घटना यह साबित करती है कि महिला अधिकारी न सिर्फ अपराध पर प्रभावी नियंत्रण करती हैं, बल्कि कठिन हालात में भी मानवता को सबसे ऊपर रखती हैं।
