नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी और 77 लाख का साइबर फ्रॉड! सूरजपुर पुलिस ने मास्टरमाइंड को दबोचा
सूरजपुर। जिले में बढ़ते साइबर अपराध और ठगी के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए सूरजपुर पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है जो नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे वसूलने के साथ-साथ देशभर में चल रहे साइबर फ्रॉड गिरोह से भी जुड़ा हुआ था।
पुलिस के अनुसार ग्राम डवना निवासी विजय प्रताप ने 29 अक्टूबर 2025 को शिकायत दर्ज कराई थी कि भूपेंद्र विश्वकर्मा ने नौकरी लगवाने का भरोसा देकर फरवरी 2024 से वर्ष 2025 के बीच अलग-अलग किश्तों में कुल 55 हजार रुपये ले लिए। जब नौकरी नहीं मिली और पैसे वापस मांगे गए तो आरोपी टालमटोल करने लगा।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
इसी दौरान पुलिस मुख्यालय से प्राप्त सूचना में सामने आया कि Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) द्वारा संचालित साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन पोर्टल पर संदिग्ध म्यूल बैंक अकाउंट की जांच में आरोपी का IDBI बैंक खाता भी शामिल है। जांच के बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दूसरा मामला दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सूरजपुर के DIG एवं SSP प्रशांत कुमार ठाकुर ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए। लगातार निगरानी और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने आरोपी भूपेंद्र विश्वकर्मा (40 वर्ष) निवासी रूनीयाडीह, वर्तमान पता नवापारा सूरजपुर को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने कई लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए और उन्हें अपनी निजी जरूरतों व शौक पूरे करने में खर्च कर दिया। उसने यह भी बताया कि साइबर फ्रॉड गिरोह के सदस्यों को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड और सिम उपलब्ध कराने के बदले उसे हर महीने लगभग 5 हजार रुपये मिलते थे।
जांच में आरोपी के बैंक खाते में करीब 77 लाख 84 हजार रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सामने आई है, जिससे उसके बड़े साइबर नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
दोनों मामलों में आरोपी को 10 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई में थाना प्रभारी विमलेश दुबे, एएसआई देव नाथ चौधरी, आरक्षक रविराज पांडेय, बृजलाल और नरेश टोप्पो की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
