ग्वालियर पुलिस का डिजिटल धमाका! अब QR कोड से चलेगा मालखाना, देश में मिसाल बना ‘ई-मालखाना’ और पहरा प्लेटफार्म

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ग्वालियर। पुलिसिंग को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में ग्वालियर पुलिस ने बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। ग्वालियर पुलिस ने ग्वालियर रेंज का पहला “ई-मालखाना” और “पहरा प्लेटफार्म” थाना पड़ाव में शुरू कर डिजिटल पुलिसिंग की नई शुरुआत की है।

इस अत्याधुनिक व्यवस्था का शुभारंभ अरविंद कुमार सक्सेना, पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर जोन द्वारा 14 अप्रैल 2026 को किया गया। कार्यक्रम में डीआईजी ग्वालियर रेंज अमित सांघी, एसएसपी धर्मवीर सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

अब मालखाना भी हुआ डिजिटल

अब तक थानों के मालखानों में जब्त सामान और केस प्रॉपर्टी ढूंढना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण काम होता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर केस से जुड़ा सामान, दस्तावेज और साक्ष्य डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेगा और सिर्फ एक क्लिक पर पूरी जानकारी उपलब्ध होगी।

एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि इस प्रणाली से पुलिसिंग अधिक स्मार्ट, जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी तथा आम जनता को तेज और भरोसेमंद पुलिस सेवा मिल सकेगी।

QR कोड से होगी हर साक्ष्य की पहचान

ई-मालखाना में रखी प्रत्येक वस्तु को यूनिक QR कोड से चिन्हित किया गया है। इससे साक्ष्यों की सुरक्षा, मॉनिटरिंग और न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान आवश्यक सामग्री तुरंत उपलब्ध हो सकेगी। पूरे मालखाने को सीसीटीवी निगरानी से भी जोड़ा गया है।

क्या है “पहरा प्लेटफार्म”?

“पहरा प्लेटफार्म” एक वेब आधारित डिजिटल सिस्टम है जिसे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल द्वारा विकसित किया गया है। इसमें अपराध क्रमांक, फोटो, लोकेशन और विवरण अपलोड करते ही सिस्टम स्वतः यूनिक कोड जनरेट करता है।

इस प्लेटफार्म की सबसे खास बात यह है कि:

  • हर मूवमेंट का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा
  • “चेन ऑफ कस्टडी” पूरी तरह सुरक्षित रहेगी
  • माल बाहर जाने पर कर्मचारी और कोर्ट आदेश की जानकारी अपलोड करनी होगी
  • हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में संचालन संभव है
  • लगभग जीरो कॉस्ट में तैयार किया गया सिस्टम

थाना पड़ाव के इस डिजिटल मालखाने में वर्ष 1993 की सबसे पुरानी जब्ती तक का रिकॉर्ड डिजिटाइज किया गया है।

डिजिटल पुलिसिंग की ओर बड़ा कदम

आईजी अरविंद कुमार सक्सेना ने कहा कि बदलते समय में तकनीक आधारित पुलिसिंग जरूरी हो चुकी है और ग्वालियर मॉडल को जल्द ही रेंज के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।

इस नवाचार से न सिर्फ पुलिस की आंतरिक कार्यप्रणाली मजबूत होगी, बल्कि आम लोगों का पुलिस व्यवस्था पर विश्वास भी और बढ़ेगा।

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