बेमेतरा के ASP हरीश यादव बने PhD, 10 साल के शोध के बाद अंग्रेजी साहित्य में हासिल की विद्या वाचस्पति उपाधि

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बेमेतरा। पुलिस सेवा की व्यस्त जिम्मेदारियों के बीच भी शिक्षा और शोध के प्रति समर्पण का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बेमेतरा जिले में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) हरीश यादव ने अंग्रेजी साहित्य में विद्या वाचस्पति (PhD) की उपाधि प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल पुलिस विभाग बल्कि पूरा जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर द्वारा उन्हें अंग्रेजी साहित्य विषय में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। उनका शोध विषय “रोमांटिकवाद और छायावाद के परिप्रेक्ष्य में विलियम वर्ड्सवर्थ एवं सुमित्रानंदन पंत का तुलनात्मक अध्ययन” रहा, जिसे साहित्यिक जगत में एक महत्वपूर्ण अकादमिक योगदान माना जा रहा है।

10 वर्षों की मेहनत और शोध का मिला प्रतिफल

बताया गया कि इस शोध कार्य को पूरा करने में लगभग दस वर्षों का समय लगा। इस दौरान हरीश यादव ने पुलिस विभाग में अपनी प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए अध्ययन, अनुसंधान और लेखन का कार्य भी लगातार जारी रखा।

लंबे समय तक विभिन्न साहित्यिक स्रोतों, शोध ग्रंथों और काव्य परंपराओं का अध्ययन करने के बाद उन्होंने अपने शोध को अंतिम रूप दिया। उनकी यह सफलता बताती है कि दृढ़ संकल्प और समय प्रबंधन के बल पर किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है।

वर्ड्सवर्थ और पंत के साहित्य का किया गहन अध्ययन

अपने शोध में हरीश यादव ने अंग्रेजी साहित्य के प्रसिद्ध रोमांटिक कवि विलियम वर्ड्सवर्थ और हिंदी साहित्य के महान छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत के काव्य का तुलनात्मक विश्लेषण किया है।

शोध के दौरान दोनों कवियों की रचनाओं में प्रकृति प्रेम, मानवीय संवेदनाएं, आध्यात्मिक दृष्टिकोण, सौंदर्यबोध और काव्य शिल्प जैसी विशेषताओं का गहन अध्ययन किया गया। साथ ही रोमांटिकवाद और छायावाद जैसी दो महत्वपूर्ण साहित्यिक धाराओं के बीच वैचारिक समानताओं और भिन्नताओं को भी विस्तार से समझाया गया है।

शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए बनेगा महत्वपूर्ण संदर्भ

विशेषज्ञों के अनुसार यह शोध हिंदी और अंग्रेजी साहित्य के बीच मौजूद वैचारिक सामंजस्य को समझने में मदद करेगा। साहित्य के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और अकादमिक जगत से जुड़े लोगों के लिए यह शोध एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री साबित हो सकता है।

यह अध्ययन भारतीय और पाश्चात्य साहित्य की दो प्रमुख काव्य परंपराओं को एक मंच पर लाकर तुलनात्मक साहित्य के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलता है।

विश्वविद्यालय और गुरुजनों के प्रति जताया आभार

अपनी इस उपलब्धि पर एएसपी हरीश यादव ने अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ललित पटेरिया, पूर्व कुलपति डॉ. ए.डी.एन. बाजपेयी, कुलसचिवों तथा अपने शोध निर्देशकों सहित विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि यह सफलता उनके गुरुजनों, परिवार, मित्रों और सहयोगियों के निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनका शोध भविष्य के शोधार्थियों के लिए प्रेरणादायक साबित होगा।

पुलिस विभाग में खुशी का माहौल

एएसपी हरीश यादव को पीएचडी की उपाधि मिलने की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में खुशी की लहर दौड़ गई। पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) रामकृष्ण साहू (IPS) सहित जिले के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर डीएसपी कौशिल्या साहू, थाना प्रभारी सोनल ग्वाला, साइबर सेल प्रभारी मयंक मिश्रा, रक्षित निरीक्षक प्रवीण खलखो समेत अनेक अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें मिठाई खिलाकर सम्मानित किया।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि हरीश यादव की यह उपलब्धि बताती है कि शिक्षा और आत्मविकास के लिए कभी भी देर नहीं होती। उन्होंने पुलिस सेवा की कठिन जिम्मेदारियों के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त कर युवाओं और पुलिस कर्मियों के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर जारी रहे, तो किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को हासिल किया जा सकता है।

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