दूसरों की जान बचाते-बचाते शहीद हुआ स्नेक कैचर मनीष पाटिल, जहरीले सांप को रेस्क्यू करते समय गई जान

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बेमेतरा/नवागढ़। दूसरों की जिंदगी बचाने का जुनून लिए वर्षों से जहरीले सांपों का निःशुल्क रेस्क्यू करने वाले मनीष पाटिल अब इस दुनिया में नहीं रहे। लोगों को सांपों से बचाने के लिए लगातार जोखिम उठाने वाले मनीष की एक रेस्क्यू कार्रवाई के दौरान जहरीले सांप के डसने से मौत हो गई। उनकी मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।

सांप को बचाते-बचाते खुद जिंदगी की जंग हार गए

ग्राम मुर्ता में सियाराम साहू के घर जहरीला सांप निकलने की सूचना मिलने पर मनीष पाटिल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सांप को पकड़कर प्लास्टिक के डिब्बे में सुरक्षित बंद कर लिया था। इसी दौरान सांप ने उनके हाथ पर डंस लिया।

सर्पदंश के बाद मनीष को तत्काल डायल-112 वाहन से नवागढ़ अस्पताल पहुंचाया गया। वहां प्राथमिक उपचार और जरूरी इंजेक्शन दिए गए। हालत गंभीर होने पर उन्हें सिम्स बिलासपुर रेफर किया गया, लेकिन बिलासपुर ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

करीब 20 एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन भी नहीं बचा सके जान

बीएमओ नवागढ़ डॉ. एम.एस. राज के अनुसार, मनीष को रात करीब 1:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उपचार के दौरान करीब 20 एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाए गए, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें बिलासपुर रेफर किया गया, मगर रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

सैकड़ों सांपों को सुरक्षित जंगल में छोड़ चुके थे

मनीष पाटिल वर्षों से क्षेत्र में बिना किसी शुल्क के सांपों का रेस्क्यू करते थे। कहीं भी सांप निकलने की सूचना मिलते ही वे लोगों की मदद के लिए पहुंच जाते थे। उन्होंने अपने जीवन में सैकड़ों सांपों को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ा था।

उनकी समाजसेवा को देखते हुए उन्हें प्रशासन की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका था। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद मनीष ने सांपों के रेस्क्यू के बदले कभी शुल्क नहीं लिया।

पीछे छूटा पत्नी और दो मासूम बेटियों का परिवार

मनीष राम मंदिर क्षेत्र में किराए के मकान में रहते थे और मजदूरी तथा वाहन चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनके परिवार में पत्नी और दो छोटी बेटियां हैं। बड़ी बेटी की उम्र करीब 5-6 वर्ष बताई गई है।

मनीष की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं से परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

दूसरों की जिंदगी बचाने वाले मनीष का अंतिम रेस्क्यू

मनीष पाटिल की जिंदगी समाजसेवा और साहस की मिसाल रही। जिन जहरीले सांपों से लोग डरकर दूर भागते थे, मनीष उन्हीं सांपों को पकड़कर लोगों की जान बचाते थे। लेकिन एक दिन दूसरों को बचाने की इसी मुहिम में उनकी अपनी जिंदगी खत्म हो गई।

मनीष पाटिल का बलिदान उन लोगों के लिए हमेशा यादगार रहेगा, जिन्होंने उन्हें केवल स्नेक कैचर नहीं, बल्कि मुसीबत की घड़ी में लोगों की जान बचाने वाला जांबाज सेवक माना।

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