विदिशा में शुरू हुई राज्य की पहली जिला स्तरीय फिंगरप्रिंट लैब, जांच होगी और वैज्ञानिक

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मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में तकनीक आधारित पुलिसिंग की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7 मार्च को राज्य की पहली जिला स्तरीय आधुनिक फिंगरप्रिंट लैब का उद्घाटन किया। यह लैब भारत सरकार के NAFIS (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) के तहत स्थापित की गई है, जिससे अपराधों की जांच अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनेगी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस आधुनिक लैब के माध्यम से अब फिंगरप्रिंट के आधार पर अपराधियों की पहचान तेजी से की जा सकेगी। विदिशा जिले में अब तक 117 मामलों में फिंगरप्रिंट के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा चुकी है, जिससे चोरी की संपत्ति की बरामदगी और गंभीर व ब्लाइंड मर्डर जैसे मामलों का खुलासा करने में भी मदद मिली है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिले के पुलिस विभाग को मिली उपलब्धियों के लिए भी सम्मानित किया। उन्होंने भोपाल (ग्रामीण) जोन के आईजी संजय तिवारी और विदिशा के पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी को जिले के 20 पुलिस थानों और 5 पुलिस कार्यालयों को प्राप्त ISO प्रमाणपत्र सौंपे।

कार्यक्रम में सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की त्वरित सहायता के लिए बनाए गए “राहवीर विदिशा” मोबाइल ऐप के डेवलपर्स को भी सम्मानित किया गया। यह ऐप एसएटीआई के विद्यार्थियों द्वारा विकसित किया गया है, जो दुर्घटना की स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाने में सहायक होगा।

पुलिस और प्रशासन ने इस ऐप के प्रभावी संचालन के लिए 150 ट्रॉमा सपोर्ट वालंटियर्स भी तैयार किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि तकनीक के इस उपयोग से न केवल अपराध जांच मजबूत होगी, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को तेजी से मदद भी मिल सकेगी।

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