‘सृजन संवाद’ से खाकी के करीब आए बच्चे, ग्वालियर के थानों में विद्यार्थियों ने जाना कानून से लेकर पुलिस कार्रवाई तक का पूरा सिस्टम

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ग्वालियर। पुलिस और बच्चों के बीच डर की दूरी कम कर विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस के ‘सृजन संवाद’ कार्यक्रम के तहत ग्वालियर जिले में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान स्कूली विद्यार्थियों को पुलिस थानों का भ्रमण कराया गया और उन्हें कानून, सुरक्षा, साइबर अपराध, महिला एवं बाल सुरक्षा सहित पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर धर्मवीर सिंह (भा.पु.से.) के निर्देश और कार्यक्रम के नोडल अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जयराज कुबेर के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

पुलिस को ‘मित्र और रक्षक’ के रूप में समझ रहे बच्चे

‘सृजन संवाद’ का उद्देश्य विद्यार्थियों के मन से पुलिस को लेकर डर की भावना दूर करना और उन्हें पुलिस की भूमिका को मित्र एवं रक्षक के तौर पर समझाना है। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक किया गया।

महिला सुरक्षा शाखा की उप पुलिस अधीक्षक शिखा सोनी और महिला थाना प्रभारी उप निरीक्षक रश्मि भदौरिया ने एबनेजर हाई सेकेंडरी स्कूल में विद्यार्थियों से संवाद किया। छात्र-छात्राओं को महिला एवं बाल सुरक्षा, गुड टच-बैड टच, आत्मरक्षा, साइबर अपराध से बचाव और हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई।

पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं और सवालों का जवाब देते हुए उन्हें किसी भी अप्रिय स्थिति में बिना डर पुलिस की सहायता लेने के लिए प्रेरित किया।

थाने में जाकर बच्चों ने समझी पुलिस की कार्यप्रणाली

‘सृजन संवाद’ के तहत विद्यार्थियों ने इंदरगंज, झांसी रोड, डबरा देहात, तिघरा, घाटीगांव, ठाठीपुर और जनकगंज सहित जिले के विभिन्न पुलिस थानों का भ्रमण किया।

थाना प्रभारियों और पुलिस अधिकारियों ने बच्चों को थाने की अलग-अलग व्यवस्थाओं की जानकारी दी। विद्यार्थियों ने मालखाना, हवालात, महिला डेस्क, रीडर कक्ष सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थानों का निरीक्षण किया।

इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने बच्चों को सरल भाषा में समझाया कि पुलिस के पास शिकायत पहुंचने के बाद रिपोर्ट दर्ज करने, विवेचना करने, रिकॉर्ड तैयार करने और न्यायालय में चालान पेश करने तक की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।

साइबर ठगी से लेकर ट्रैफिक नियमों तक मिली जानकारी

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को साइबर अपराध से बचने, सोशल मीडिया का सुरक्षित इस्तेमाल करने और ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत पुलिस को सूचना देने के बारे में जागरूक किया गया।

इसके अलावा बच्चों को महिला एवं बाल अधिकार, आत्मरक्षा, आपात स्थिति में पुलिस सहायता, हेलमेट की अनिवार्यता और यातायात नियमों का पालन करने के लिए भी प्रेरित किया गया।

पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से कहा कि किसी भी अपराध, असुरक्षा या परेशानी की स्थिति में वे बिना भय के पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।

संवाद से बढ़ा पुलिस और बच्चों का भरोसा

‘सृजन संवाद’ कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर बना। बच्चों ने पुलिस अधिकारियों से कानून और सुरक्षा से जुड़े कई सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पाया।

इस पहल के जरिए पुलिस ने बच्चों को यह संदेश दिया कि खाकी सिर्फ कार्रवाई करने वाली पुलिस नहीं, बल्कि जरूरत के समय सुरक्षा और सहायता देने वाली मित्र भी है। ऐसे कार्यक्रम पुलिस और नई पीढ़ी के बीच विश्वास मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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