10 साल सेवा के बाद भी नहीं होंगे बेघर, महाराष्ट्र के रिटायर्ड पुलिस डॉग्स को मिलेगी जिंदगीभर पुलिस की छांव
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस डॉग्स को लेकर एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि करीब 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद रिटायर होने वाले पुलिस डॉग्स को अब पुलिस बल से अलग नहीं किया जाएगा। वे अपने परिचित माहौल और हैंडलर के साथ ही अपना बाकी जीवन बिताएंगे।
🐕 रिटायरमेंट के बाद भी जारी रहेगा पुलिस परिवार से रिश्ता
अब तक नियमों के अनुसार सेवा पूरी करने के बाद पुलिस डॉग्स को बाहरी संस्थाओं या लोगों को गोद दिए जाने की व्यवस्था थी। इसके कारण कई डॉग्स अपने हैंडलर और परिचित माहौल से अलग होने के बाद तनाव में चले जाते थे।
नई व्यवस्था के तहत रिटायरमेंट के बाद भी इन चार पैरों वाले पुलिसकर्मियों को उसी पुलिस परिवार के बीच रखने का फैसला किया गया है, जहां उन्होंने अपनी सेवा का लंबा समय बिताया।
🏠 खाने से लेकर इलाज तक सरकार उठाएगी खर्च
सरकार के फैसले की सबसे खास बात यह है कि रिटायर्ड पुलिस डॉग्स की देखभाल का आर्थिक बोझ उनके हैंडलर या संबंधित पुलिसकर्मियों पर नहीं पड़ेगा।
महाराष्ट्र गृह विभाग इन डॉग्स के—
- भोजन
- स्वास्थ्य देखभाल
- चिकित्सा खर्च
- जरूरी देखभाल और अन्य आवश्यकताओं
का खर्च वहन करेगा।
❤️ आखिरी समय अपनों के बीच बिताएंगे वफादार साथी
पुलिस डॉग्स करीब 10 साल तक बम डिटेक्शन, नारकोटिक्स की पहचान, अपराधियों की तलाश, ट्रैकिंग और अन्य महत्वपूर्ण पुलिस अभियानों में अपनी भूमिका निभाते हैं।
जानकारी के अनुसार, इतनी लंबी सेवा के बाद उनका औसत शेष जीवनकाल अक्सर करीब 1 से 1.5 वर्ष का ही रह जाता है। ऐसे में सरकार का उद्देश्य उनके जीवन के अंतिम पड़ाव को सुरक्षित, आरामदायक और सम्मानजनक बनाना है।
👮♂️ हैंडलर और डॉग का रिश्ता सबसे खास
पुलिस डॉग और उसके हैंडलर के बीच वर्षों की ट्रेनिंग और ड्यूटी के दौरान गहरा संबंध बनता है। दोनों ने साथ मिलकर कई ऑपरेशन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया होता है।
रिटायरमेंट के बाद इस रिश्ते को खत्म करने के बजाय डॉग को उसी परिचित माहौल में रखने का फैसला उनके मानसिक और भावनात्मक कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
🇮🇳 चार पैरों वाले पुलिसकर्मियों को सम्मान
महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला सिर्फ पशु कल्याण से जुड़ा कदम नहीं, बल्कि उन चार पैरों वाले पुलिसकर्मियों के प्रति सम्मान भी है जिन्होंने वर्षों तक पुलिस बल के साथ मिलकर अपराधों की जांच, विस्फोटक और नशीले पदार्थों की पहचान तथा सुरक्षा अभियानों में योगदान दिया।
10 साल सेवा… फिर भी रिटायरमेंट के बाद अकेलापन नहीं।
अब महाराष्ट्र के ये वफादार पुलिस साथी अपनी जिंदगी का आखिरी पड़ाव भी उसी पुलिस परिवार के बीच बिताएंगे, जिसके लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया।
