E-ZIRRO FIR से खुला डिजिटल अरेस्ट ठगी का इंटरस्टेट नेटवर्क, 12 साइबर ठग गिरफ्तार; ₹54.84 लाख बरामद

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देवास। मध्य प्रदेश के देवास पुलिस ने E-ZIRRO FIR के जरिए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर चल रहे एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 12 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया और करीब ₹54.84 लाख की ठगी की रकम बरामद की है।

इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस की 19 टीमों के 70 जवानों ने लगातार 127 दिनों तक काम किया। जांच के दौरान टीमों ने देश के 17 राज्यों के 33 जिलों में करीब 50 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर आरोपियों तक पहुंच बनाई।

🔴 127 दिन चला ऑपरेशन, 50 हजार KM से ज्यादा की जांच

देवास पुलिस ने इस मामले में तकनीकी और वित्तीय जांच को आधार बनाया। पुलिस टीमों ने बैंक ट्रांजेक्शन, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, बैंक स्टेटमेंट, CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया।

लगातार 127 दिनों की जांच और अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंची और 12 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया।

📱 अधिकारी बनकर किया था डिजिटल अरेस्ट का खेल

आरोपियों ने पीड़ित को फोन कर खुद को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और CBI का अधिकारी बताया।

पीड़ित को कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाया गया। इसके बाद फर्जी जांच के नाम पर उससे करीब ₹63.52 लाख की ठगी की गई।

पुलिस जांच में सामने आया कि यह किसी एक व्यक्ति की ठगी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय साइबर अपराधियों का नेटवर्क था।

💰 ₹63.52 लाख की ठगी, ₹54.84 लाख की रकम बरामद

पुलिस के मुताबिक फर्जी जांच और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पीड़ित से कुल ₹63.52 लाख की धोखाधड़ी की गई थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब ₹54.84 लाख की ठगी की रकम बरामद करने में सफलता हासिल की।

👮‍♂️ 19 टीमों के 70 पुलिसकर्मियों ने संभाला मोर्चा

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यापक अंतरराज्यीय स्तर रहा। देवास पुलिस की 19 टीमों में शामिल 70 पुलिसकर्मियों ने 17 राज्यों के 33 जिलों में जांच की।

पुलिस ने बैंकिंग ट्रेल से लेकर मोबाइल नंबर, CCTV और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जोड़कर आरोपियों की कड़ियां खंगालीं। इस कार्रवाई में तकनीकी जांच, वित्तीय जांच, साइबर इन्वेस्टिगेशन और अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय की अहम भूमिका रही।

🏆 DGP करेंगे पुलिस टीम को सम्मानित

ऑपरेशन की सफलता पर DGP श्री कैलाश मकवाना द्वारा कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम को पुरस्कृत किए जाने की बात कही गई है। इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ तकनीक और पारंपरिक पुलिसिंग के प्रभावी इस्तेमाल का उदाहरण माना जा रहा है।

⚠️ नागरिकों के लिए सबसे जरूरी चेतावनी

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि “Digital Arrest” नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।

अगर कोई व्यक्ति पुलिस, CBI, ED, दूरसंचार विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाए और पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज करें।

📌 याद रखें

सरकारी अधिकारी बनकर डराना → फर्जी केस बताना → वीडियो कॉल पर निगरानी → पैसे ट्रांसफर कराने का दबाव = डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड का बड़ा संकेत।

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